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उत्तराखंड: मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए वन विभाग की खास पहल: 10 जिलों में बनेंगे लेपर्ड रिहैबिलिटेशन सेंटर

उत्तराखंड: उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष और रेस्क्यू किए गए घायल, बीमार व आदमखोर गुलदारों के इलाज और पुनर्वास की चुनौती से निपटने के लिए वन विभाग ने एक खास मास्टरप्लान तैयार किया है।

अंतिम मंजूरी का इंतजार

जिस पर इसके तहत राज्य के 10 जिलों में एक-एक ‘रीजनल लेपर्ड ट्रांजिट ट्रीटमेंट एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर’ स्थापित किए जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सेंटरों के निर्माण के लिए क्षतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा) से 16 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित कर दिया गया है। अब इस परियोजना के लिए केवल केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।

​इन जिलों में रेस्क्यू सेंटर

​वर्तमान में राज्य में केवल चार प्रमुख रेस्क्यू सेंटर—हरिद्वार, ढेला, रानीबाग और अल्मोड़ा—ही संचालित हैं। इन चारों सेंटरों में इस समय 40 से अधिक गुलदार रखे गए हैं, जिससे वहां अब और नए गुलदारों को रखने की जगह नहीं बची है।‌ अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) विवेक पांडेय ने बताया कि रुद्रप्रयाग और चमोली सहित अन्य 10 जिलों में इन सेंटरों के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि का चयन कर लिया गया है।
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजा जा चुका है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही वहां से हरी झंडी मिल जाएगी।

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