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उत्तराखंड: शिव- पार्वती का विवाह स्थल त्रिजुगीनारायण मंदिर, वैदिक पर्यटन गांव के रूप में विकसित करेगी सरकार

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है शिव- पार्वती का विवाह स्थल त्रिजुगीनारायण मंदिर। यह मंदिर भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यह मंदिर अपनी दिव्य धार्मिक मान्यताओं, अनूठी स्थापत्य शैली, और अखंड धूनी (शाश्वत अग्नि) के लिए जाना जाता है।

दिए यह निर्देश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मंदिर को वैदिक पर्यटन गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। इस संबंध में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वैदिक पर्यटन गांव घोषित करने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा, त्रियुगीनारायण मंदिर वेडिंग डेस्टिनेशन में रूप में उभर रहा है। इस स्थान की पौराणिक कथाओं व प्राकृतिक सुंदरता को देखते हुए वैदिक पर्यटन गांव घोषित किया जाए।

भगवान शिव और देवी पार्वती का संपन्न हुआ था विवाह

त्रिजुगीनारायण मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रियुगीनारायण मंदिर वह स्थान है जहाँ देवताओं ने स्वयं भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का उत्सव मनाया था। माना जाता है कि मंदिर में अखंड ज्योति उनकी शादी के समय जलाई गई थी और यह दिव्य आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में जलती रहती है। स्वयं भगवान विष्णु ने इस विवाह में देवी पार्वती के भाई (कन्यादान कर्ता) का कर्तव्य निभाया था। मंदिर में सदियों से जल रही अखंड धूनी (शाश्वत अग्नि) है, जो मंदिर के धार्मिक महत्व को और भी बढ़ाती है और भक्तों को आकर्षित करती है।

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