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उत्तराखंड: स्वास्थ्य सेवाओं पर मंडराया संकट, डॉक्टरों के स्थानांतरण पर सरकार का ‘यू-टर्न’, हाई कोर्ट के दखल के बाद फैसले पर पुनर्विचार की तैयारी

नैनीताल: उत्तराखंड में डॉक्टरों के बड़े पैमाने पर किए गए स्थानांतरणों के विरोध में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसके बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

लिया यह निर्णय

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदेश भर में स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को बिना किसी प्रतिस्थानी (रिप्लेसमेंट) के हटाए जाने से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई थीं, जिसके चलते मैदानी क्षेत्रों से लेकर पर्वतीय अंचलों तक विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने अब अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया है।
​सरकार ने हाई कोर्ट में दी यह जानकारी

​रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते कल शुक्रवार को राज्य सरकार ने इस मामले से संबंधित जानकारी उत्तराखंड हाई कोर्ट को दी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दायर जनहित याचिका पर वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि स्थानांतरण नीति पर पुनर्विचार किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने भवाली सेनिटोरियम को ‘सुपर स्पेशलिटी अस्पताल’ के रूप में विकसित करने की दिशा में हो रही प्रगति पर भी संज्ञान लिया। खंडपीठ ने स्वास्थ्य सचिव को निर्देशित किया है कि वे इस अस्पताल के लिए तैयार डीपीआर (DPR) से संबंधित प्रगति रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर कोर्ट में पेश करें।

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