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उत्तराखंड: खेमराज सुंदरियाल और बागेश्वर के कैलाश चंद्र पंत को भी पद्मश्री सम्मान, किए हैं यह उल्लेखनीय कार्य

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बीते कल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। जिसमें उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (83) को इस साल पद्म भूषण देने की घोषणा हुई है। इसके अलावा पौड़ी गढ़वाल के खेमराज सुंदरियाल और बागेश्वर के कैलाश चंद्र पंत को भी पद्मश्री सम्मान मिला है।

हथकरघा उद्योग को विदेशों तक दिलाई पहचान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रिटिश गढ़वाल में किसान परिवार में 2 फरवरी 1943 में जन्मे खेमराज सुंदरियाल पानीपत (हरियाणा) के बुनकर सेवा केंद्र और अपनी सहकारी समिति के माध्यम से 84 वर्ष की आयु में हथकरघा उद्योग को नई ऊंचाईयां दे रहे हैं। ब्रिटिश गढ़वाल में जन्में खेमराज सुंदरियाल इस वक्त 84 साल के हैं। उन्होंने हथकरघा उद्योग को विदेशों तक पहचान दिलाई है। पौड़ी गढ़वाल के सुमाड़ी गांव से निकलकर पानीपत के हथकरघा को दुनिया में अलग पहचान दिलाने वाले खेमराज सुंदरियाल को पद्मश्री सम्मान मिला है। उनका यह सफर हैंडलूम और बुनाई के क्षेत्र लगे उन तमाम बुनकरों के लिए प्रेरणा से भरा है, जो हथकरघा के क्षेत्र हुए बड़े बदलाव के बीच काम कर रहे हैं।

सम्मान से सम्मानित

इसके अलावा कैलाश चंद्र पंत बागेश्वर के कांडा तहसील के खंतोली के तल्ला गांव के रहने वाले हैं। पत्रकारिता शिक्षा और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। साप्ताहिक जनधर्म और मासिक अक्षरा के संपादक के रूप में उनकी अखिल भारतीय प्रतिष्ठा रही है।

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