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उत्तराखंड: मोबाइल छीन रहा बच्चों का बचपन, ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों में बढ़ रही यह समस्या

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड में समय बदलने के साथ ही बच्चों में मोबाइल के इस्तेमाल का समय भी बढ़ने‌ लगा है। जो एक बड़ा चिंता का विषय है।

बढ़ रहें यह मामले

वहीं इन दिनों किशोरों में नोमोफोबिया (नो मोबाइल फोन फोबिया) की समस्या लगातार बढ़ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हल्द्वानी के डाॅ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में कुमाऊं क्षेत्र से लगातार ऐसे मामले आ रहे हैं। जिसमें बच्चों ने आनलाइन गेमिंग, चैटिंग और रील को अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा बना लिया है। बताया कि परिवार और दोस्तों से बातचीत बंद कर घंटों कमरे में बंद रहकर डिजिटल गतिविधियों में सक्रिय रह रहे हैं। मोबाइल लेने पर उनका आक्रामक स्वभाव देखने को मिल रहा है। बीते कुछ समय में इस तरह के केसों में हुई वृद्धि देख मनोविज्ञानी भी हैरत में हैं।

एक चिंता का विषय

बच्चों में मोबाइल का बढ़ता उपयोग एक गंभीर चिंता का विषय है, जो उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। स्क्रीन के अधिक समय (screen time) से आंखों की रोशनी, एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, नींद में बाधा और शारीरिक गतिविधि में कमी आ रही है। अत्यधिक स्क्रीन समय 11 वर्ष की उम्र से ही बच्चों में सोशल मीडिया की लत और अवसाद जैसी मानसिक समस्याएं पैदा कर रहा है। ऐसे में बच्चों के लिए स्क्रीन का समय निश्चित करें, विशेष रूप से सोने से एक घंटा पहले स्क्रीन बंद करें। बच्चों को खेलकूद, बागवानी और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।

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