Site icon Khabribox

उत्तराखंड NEET फर्जीवाड़ा: हाईकोर्ट ने दिया यह बड़ा आदेश, सभी अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की होगी दो साल में जांच, इतने  दाखिले रद्द

​उत्तराखंड: उत्तराखंड में नीट (NEET) काउंसलिंग के दौरान फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए आरक्षण का लाभ लेने के मामले में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस पर अदालत ने राज्य के सभी अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की गहराई से जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने गुरुवार को यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि इन अनियमितताओं की जांच के लिए पहले ही एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा चुका है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राजस्व सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे सभी संदिग्ध सर्टिफिकेट्स का दो साल के भीतर सत्यापन और गहरी जांच सुनिश्चित करें। इन निर्देशों के साथ अदालत ने जनहित याचिका का निस्तारित कर दिया है।
​
सत्यापन में यह खुलासा

​याचिका पर सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि नीट की पहली और दूसरी काउंसलिंग में कई अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के तहत फर्जी प्रमाण पत्र लगाए थे। दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि प्रमाण पत्र संख्या किसी और की थी और नाम किसी अन्य व्यक्ति का दर्ज था। याची के सत्यापन में खुलासा हुआ कि न सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे, बल्कि ईडब्ल्यूएस, आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र भी फर्जी तरीके से तैयार किए गए। इसके सहारे लगभग 770 ऐसे छात्रों ने आरक्षण का लाभ उठाया जो उत्तराखंड के मूल निवासी नहीं हैं, जबकि उनके स्कूल और कॉलेज तमिलनाडु, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों से संबंधित पाए गए।

​754 छात्रों की जांच

​फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला पाने वाले 20 छात्रों का सीट आवंटन हेमवती नंदन बहुगुणा (HNB) मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा अब तक निरस्त किया जा चुका है। यूनिवर्सिटी की तरफ से पहली और दूसरी काउंसलिंग में श्रेणी व उपश्रेणी कोटे का लाभ लेने वाले 754 छात्र-छात्राओं के प्रमाण पत्रों की जांच कराई जा रही है।

Exit mobile version