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उत्तराखंड: पिरूल बना संजीवनी: भिंगराड़ा का महिला माॅडल देखने उत्तराखंड पहुंचे अरुणाचल के वैज्ञानिक, समझा पिरूल से ऊर्जा उत्पादन का गणित

उत्तराखंड: लोहाघाट के पाटी ब्लाक स्थित भिंगराड़ा में पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियां) से ऊर्जा उत्पादन का पाइन नीडल ब्रिकेटिंग प्लांट अब अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन गया है।

किया दौरा

जिस पर अरुणाचल प्रदेश स्टेट काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलाजी के अध्यक्ष डा. टागे टाकी और श्रींटागे तागयो ने प्लांट का दौरा कर इसकी कार्यप्रणाली और पर्यावरणीय व आर्थिक लाभों को समझा। जानकारी के अनुसार यूकोस्ट (UCOST) के वित्त पोषण और CSIR-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून द्वारा स्थापित इस संयंत्र का पूरा संचालन स्थानीय ग्रामीण महिलाओं का समूह कर रहा है। बताया कि पिरूल एकत्रीकरण से लेकर ब्रिकेट निर्माण तक की जिम्मेदारी महिलाएं खुद संभाल रही हैं। यह परियोजना जंगलों को आग से बचाने के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण आजीविका के लिए भी मिसाल होगी।

पहल की सराहना की

जिस पर डाॅ. टाकी ने महिला सशक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण की इस पहल को सराहा और अरुणाचल प्रदेश में भी पिरूल जैसे बायोमास से ऊर्जा व रोजगार पैदा करने के लिए इस माॅडल को अपनाने की बात कही।

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