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उत्तराखंड: नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ में कार्यक्रम का आयोजन, बधाड़ व दशोली डोली पड़ाव के लिए जारी हुआ कार्यक्रम, देखें

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के गोपेश्वर में सिद्धपीठ कुरुड़ में वसंत पंचमी पर बड़ी नंदा जात आयोजन समिति का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन

जिसमें कुरुड़ नंदा मंदिर समिति ने इसी वर्ष पांच सितंबर से प्रस्तावित बड़ी नंदा देवी जात की तैयारियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नंदा देवी मंदिर में नौटी में शुक्रवार सुबह देवी पाठ के साथ हवन-यज्ञ शुरू हुआ। इससे पूर्व, महिला मंगल दलों ने मुख्य बाजार से मंदिर परिसर तक भव्य कलश यात्रा निकाली। उन्होंने भजन-कीर्तन और देवी जागर में भी भाग लिया। कांसुवा से राज छंतोली को लेकर पहुंचे राजवंशी डा. राकेश कुंवर व भूपेंद्र सिंह कुंवर ने मंदिर में पूजा-अर्चना की। फिर राजवंशी कुंवर व पुरोहितों ने राज छंतोली और लाटू देवता के निसाण (प्रतीक) को शैलेश्वर मंदिर पहुंचाया। इस मौके पर लोकगायक दर्शन सिंह फर्स्वाण ने मां नंदा के जागरों की प्रस्तुति दी, जबकि महिला मंगल दलों ने भी झुमैलो व जागर गीतों का गायन किया।

2026 में बड़ी नंदा देवी जात का कार्यक्रम

नंदा राजराजेश्वरी : बधाण क्षेत्र की डोली के पड़ाव

• पांच सितंबर : सिद्धपीठ कुरुड़ से चरबंग
• छह सितंबर : चरंबग से कुंडबगड़ होते हुए मथकोट
• सात सितंबर : मथकोट से धरगांव, नंदानगर होते हुए उस्तोली
• आठ सितंबर : उस्तोली से सरपाणी, लांखी होते हुए भेंटी
• नौ सितम्बर 26- भेंटी से स्यांरी बंगाली होते हुए डुंग्री।
• 10 सितंबर : डुंग्री से केरा, मैन होते हुए सूना
• 11 सितंबर : सूना से थराली, राडीबगड़ होते हुए चेपड़ों
• 12 सितंबर : चेपड़ों से कोठी होते हुए नंदकेसरी। (गढ़वाल-कुमाऊं की राज छंतोलियों का मिलन)
• 13 सितंबर : नंदकेसरी से पूर्णा, देवाल, इच्छोली, हाट होते हुए फल्दियागांव
• 14 सितंबर : फल्दियागांव से कांडई, लबू, ल्वाणी, बगड़ीगाड होते हुए मुंदोली
• 15 सितंबर : मुंदोली से लोहाजंग, कार्तिकबगड़, देवी लाटू मिलन वाण
• 16 सितंबर : वाण से रणकधार होते हुए गैरोलीपातल
• 17 सितंबर : गैरोलीपातल से डोलीधार होते हुए वेदनी
• 18 सितंबर : वेदनी में नंदा सप्तमी पूजा के बाद पातर नचौंणियां
• 19 सितंबर : पातर नचैंणियां से कलवा विनायक, रूपकुंड, ज्यूंरागली-शिलासमुद्र
• 20 सितंबर : शिलासमुद्र से पंचगंगा, होमकुंड में बड़ी जात और जामुनडाली
• 21 सितंबर : जामुनडाली से तातड़ा होते हुए सुतोल
• 22 सितंबर : सुतोल से कनोल होते हुए वाण
• 23 सितंबर : वाण से कुलिंग
• 24 सितंबर : कुलिंग से बगड़ीगाड होते हुए ल्वाणी
• 25 सितंबर : ल्वाणी से उलंग्रा
• 26 सितंबर : उलंग्रा से हाट होते हुए वेराधार
• 27 सितंबर : वेराधार से टुनरी होते हुए गोठिंडा
• 28 सितंबर : गोठिंडा से कुनीपार्था होते हुए कुराड़
• 29 सितंबर : सगवाड़ा से डांखोली
• 30 सितंबर : डांखोली से भेटा होते हुए नंदा देवी सिद्धपीठ देवराड़ा
• (देवराड़ा में देवी नंदा छह माह का प्रवास करती हैं)

नंदा देवी : दशोली क्षेत्र की डोली के पड़ाव

• पांच सितंबर : सिद्धपीठ कुरुड़ से धरगांव होते हुए कुमजुग
• छह सितंबर : कुमजुग से कुंडबगड़ होते हुए लुणतरा
• सात सितंबर : लुणतरा से कांडा, खुनाणा, लामसोड़ा, माणखी, चोपड़ाकोट होते हुए कांडई
• आठ सितंबर : कांडई से खलतरा, मोठा, चाका होते हुए सेमा
• नौ सितंबर : सेमा से बैरासकुंड, इतमोली, घुवड़खेत होते हुए मटई ग्वाड़
• 10 सितंबर : मटई ग्वाड़ से दाणू मंदिर होते हुए पगना
• 11 सितंबर : पगना से भौंधार, चरबंग होते हुए ल्वाणी
• 12 सितंबर : ल्वाणी से सुंग, बौंटाखाल होते हुए रामणी
• 13 सितंबर : रामणी से कासमातोली, घूनी, पडेरगांव, बूरा होते हुए आला
• 14 सितंबर : आला से जोखना, सितेल होते हुए कनोल।
• 15 सितंबर : कनोल से वाण (लाटू देवता समेत सभी देव डोलियों का मिलन)
• 16 सितंबर : वाण से गैरोलीपातल
• 17 सितंबर : गैरोलीपातल से वेदनी
• 18 सितंबर : वेदनी में अमुकता भरणी नंदा सप्तमी पूजा के बाद पातर नचैंणियां
• 19 सितंबर : पातर नचौंणियां से कलवा विनायक, रूपकुंड, ज्यूंरागली होते हुए शिलासमुद्र
• 20 सितंबर : शिलासमुद्र से पंचगंगा, त्रिशूली, होमकुंड होते हुए जामुनडाली
• 21 सितंबर : जामुनडाली से तातड़ा, द्योसिंग धाम होते हुए सुतोल
• 22 सितंबर : सुतोल से फरखेत।
• 23 सितंबर : फरखेत से कुरुड़ नंदाधाम।

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