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बदल जाएगी उत्तराखंड की सूरत: रानीखेत में पार्किंग और रुद्रपुर में प्रदेश का सबसे आधुनिक ‘Eco-Friendly’ ऑफिस होगा तैयार

उत्तराखंड: अल्मोड़ा के रानीखेत में पर्यटन व व्यापारिक गतिविधियों को रफ्तार देने और रुद्रपुर में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए आवास विभाग ने अपनी कवायद तेज कर दी है।

कवायद‌ तेज

जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के बाद आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने सचिवालय में दो बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की। इस बैठक में जहाँ रानीखेत में यातायात को सुचारू करने के लिए दो बहुमंजिला (मल्टीलेवल) पार्किंग परियोजनाओं की संशोधित रिपोर्ट तलब की गई, वहीं ऊधमसिंहनगर जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के नए अत्याधुनिक कार्यालय भवन के निर्माण को समयसीमा के भीतर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए।
​दूर होगा जाम का झंझट

रानीखेत के सदर बाजार और मुख्य मार्गों पर लगने वाले जाम से स्थानीय लोगों और पर्यटकों को जल्द राहत मिलने वाली है। शासन स्तर पर दो प्रमुख स्थलों पर मल्टीलेवल पार्किंग बनाने पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। जिसमें​ सदर बाजार के समीप प्रस्तावित गैस गोदाम/आशियाना 4 मंजिला पार्किंग में 59 वाहनों के खड़े होने की व्यवस्था होगी। इसके लिए तकनीकी संपरीक्षा प्रकोष्ठ ने ₹861.73 लाख की धनराशि को औचित्यपूर्ण माना है। ​रोडवेज स्टेशन पार्किंग में छावनी परिषद से अनापत्ति (NOC) प्राप्त इस परियोजना के लिए ₹480.23 लाख की राशि उचित पाई गई है। यहाँ कुल 154 वाहनों (13 चारपहिया और 141 दोपहिया) को पार्क करने की आधुनिक सुविधा विकसित होगी।

यह परियोजनाएं

आवास सचिव ने जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, अल्मोड़ा को निर्देश दिए हैं कि दोनों परियोजनाओं की व्यवहार्यता (Feasibility), राजस्व मॉडल और स्थानीय आवश्यकताओं का गहन परीक्षण कर संशोधित आंगणन (Estimate) जल्द से जल्द शासन को सौंपें। ऊधमसिंहनगर जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण को जल्द ही अपना स्वतंत्र और आधुनिक कार्यालय मिलने जा रहा है। वर्तमान में यह विकास भवन से संचालित हो रहा है। तहसील रुद्रपुर के ग्राम कल्याणपुर में 8740 वर्गमीटर भूमि पर यह नया कार्यालय बन रहा है। इसकी कुल लागत ₹18.01 करोड़ है। वर्तमान में भवन का 50 प्रतिशत भौतिक निर्माण पूरा हो चुका है। भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस परियोजना को अपनी विशेष सूची में शामिल करते हुए 2 करोड़ रुपये की शुरुआती स्वीकृति दी है। शेष खर्च प्राधिकरण के अवस्थापना कोष से किया जा रहा है। इस भवन की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण के अनुकूल होना है। कुल भूमि के केवल 40% हिस्से पर निर्माण हो रहा है, जबकि 60% हिस्सा लैंडस्केपिंग और पार्किंग के लिए सुरक्षित रहेगा। भवन में निम्नलिखित आधुनिक प्रणालियां लगाई जा रही हैं।
◦ ​सोलर एनर्जी सिस्टम (सौर ऊर्जा)
◦ ​रेन वाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन)
◦ ​सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP)

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