उत्तराखंड: महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वास्थ्य को लेकर अब सरकारी दफ्तरों की लापरवाही भारी पड़ने वाली है। सर्वोच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों के बाद देहरादून जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है।
दिए यह निर्देश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी क्रम में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह ने जिले के सभी विभागों को अल्टीमेटम जारी किया है। साथ ही कहा कि 30 मई तक महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ी सभी अनिवार्य व्यवस्थाएं हर हाल में लागू की जाएं। तय समय सीमा में देरी या लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही हर दफ्तर में महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से बचाव, निषेध और निवारण संबंधी जागरूकता बोर्ड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
यह रूम होंगे अनिवार्य
महिला कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता और कामकाजी माताओं की सहूलियत के लिए प्रशासन ने बड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। जिसमें सभी सरकारी कार्यालयों के महिला शौचालयों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और इस्तेमाल किए गए पैड्स के निस्तारण के लिए इंसीनेरेटर मशीनें लगाई जाएंगी। मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम-2017 के तहत कार्यालयों में फीडिंग रूम (अमृत कक्ष), स्वच्छ शौचालय और योग कक्ष बनाए जाएंगे। जिन सार्वजनिक या सरकारी भवनों में 50 या उससे अधिक महिला कार्मिक कार्यरत हैं, वहां अनिवार्य रूप से एक क्रेच सेंटर स्थापित करना होगा।