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उत्तराखंड: चारधाम यात्रा में ‘डिजिटल डिपाजिट रिफंड सिस्टम’ की उपलब्धि: केदारनाथ से 85% प्लास्टिक कचरा किया वापस

उत्तराखंड: उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा में अब आस्था के साथ-साथ स्वच्छता का एक नया अध्याय जुड़ गया है। जिसमें केदारनाथ, गंगोत्री और बदरीनाथ के पैदल मार्गों पर कभी बिखरी रहने वाली प्लास्टिक की बोतलें और चिप्स-बिस्किट के रैपर अब वापस संग्रह केंद्रों तक पहुंच रहे हैं।

देखें यह आंकड़े

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस खास बदलाव का श्रेय ‘डिजिटल डिपाजिट रिफंड सिस्टम’ (DDRS) को जाता है, जिसने श्रद्धालुओं को प्लास्टिक कचरा वापस लौटाने के लिए प्रेरित किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले चार वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तीनों धामों से कुल 58,175 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा वापस संग्रहित किया गया है। इसमें से अकेले केदारनाथ धाम से रिकॉर्ड 85 प्रतिशत यानी 49,532 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा वापस लौटाया गया। वहीं, गंगोत्री से 4,300 किलोग्राम (7.4 प्रतिशत) और बदरीनाथ से 4,343 किलोग्राम (7.5 प्रतिशत) प्लास्टिक कचरे की रिकवरी की गई।
​राज्य सरकार ने अप्रैल 2022 में सबसे पहले केदारनाथ में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर डीडीआरएस (DDRS) व्यवस्था लागू की थी। इसके उत्साहजनक नतीजों को देखते हुए मई 2023 में इसे गंगोत्री और मई 2024 में बदरीनाथ में भी लागू कर दिया गया। चारधाम में मिली इस बड़ी सफलता के बाद अब उत्तराखंड सरकार इस स्वच्छता मॉडल को राज्य के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी विस्तार देने जा रही है।

जानें इस तकनीक के बारे में

जिसमें यात्रा मार्ग पर बिकने वाली प्लास्टिक पैकेजिंग और बोतलों पर एक विशेष क्यूआर (QR) कोड लगाया जाता है, जिसके एवज में खरीदार से 10 रुपये की सुरक्षा डिपाजिट राशि ली जाती है। सामग्री का उपयोग करने के बाद जब यात्री उस खाली बोतल या रैपर को निर्दिष्ट संग्रह केंद्र पर जमा करते हैं, तो उन्हें उनकी 10 रुपये की डिपाजिट राशि तुरंत वापस (रिफंड) मिल जाती है। संग्रह केंद्रों पर एकत्रित होने वाले इस प्लास्टिक कचरे को नष्ट करने के बजाय रीसाइक्लिंग के लिए अधिकृत एजेंसियों को भेज दिया जाता है।

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