उत्तराखंड: ऊखीमठ: द्वितीय केदार भगवान मध्यमेश्वर जी की चल विग्रह उत्सव डोली पारंपरिक धार्मिक उल्लास और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंगलवार को अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से मध्यमेश्वर धाम के लिए रवाना हो गई है।
डोली को किया विदा
इस मौके पर भक्तों के भारी जयकारों और पुष्पवर्षा के बीच डोली अपने पहले रात्रि प्रवास के लिए देर शाम राकेश्वरी मंदिर, रांसी पहुंची। वहीं आज (20 मई) सुबह डोली रांसी से प्रस्थान कर अगले पड़ाव गौंडार के लिए रवाना होगी। जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह ब्रह्म बेला में मध्यमेश्वर धाम के प्रधान पुजारी शिव शंकर लिंग ने पंचांग पूजन के साथ भगवान मध्यमेश्वर सहित सभी देवी-देवताओं का आह्वान किया। इसके बाद हक-हकूकधारी गांवों के ग्रामीणों ने बाबा की डोली का भव्य श्रृंगार कर विशेष आरती उतारी। सुबह ठीक सात बजे भगवान मध्यमेश्वर की डोली ने ओंकारेश्वर मंदिर की परिक्रमा की, जिसके बाद प्रधान पुजारी बागेश लिंग एवं शिव लिंग ने आरती उतारकर डोली को धाम के लिए विदा किया। उत्सव डोली डगवाड़ी, ब्राह्मणखोली, मंगोलचारी, सलामी, फापंज, मनसूना, बुरुवा, राऊलैंक एवं उनियाणा सहित विभिन्न यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देती हुई रांसी पहुंची।
कल खुलेंगे कपाट
तय कार्यक्रम के अनुसार, 20 मई को बाबा मध्यमेश्वर की डोली राकेश्वरी मंदिर रांसी से आगे बढ़कर गौंडार पहुंचेगी। इसके बाद, 21 मई को भगवान मध्यमेश्वर की डोली अपने धाम पहुंचेगी, जहां वैदिक मंत्रोच्चारण और संपूर्ण धार्मिक परंपराओं के साथ ग्रीष्मकाल के लिए मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।