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उत्तराखंड: अलकनंदा-भागीरथी के संगम पर बसा पावन श्री रघुनाथ मंदिर, भगवान राम से जुड़ी है यह अलौकिक पौराणिक कथा

उत्तराखंड: उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के लिए दुनियाभर में विख्यात है। देवभूमि की इसी आध्यात्मिक महिमा को साझा करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक वीडियो शेयर किया।

श्रद्धालुओं से की यह अपील

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल पर टिहरी गढ़वाल के प्रसिद्ध श्री रघुनाथ मंदिर का एक भव्य वीडियो शेयर किया और इसकी ऐतिहासिक विरासत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने वीडियो के साथ लिखा, “टिहरी गढ़वाल जिले के देवप्रयाग में, जहां पवित्र अलकनंदा और भागीरथी नदियों का संगम होता है, वहां प्राचीन श्री रघुनाथ मंदिर स्थित है। यह भगवान श्रीराम को समर्पित एक ऐतिहासिक और पवित्र मंदिर है, जो वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास का केंद्र रहा है।” उन्होंने आगे देश-दुनिया के पर्यटकों और श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि यदि आप टिहरी गढ़वाल की यात्रा पर जाएं, तो प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर इस पावन धाम के दर्शन और आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।

भगवान राम ने की थी तपस्या

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण वध के बाद ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्रीराम ने देवप्रयाग में ही तपस्या की थी। स्कंद पुराण के ‘केदार खंड’ में भी इस प्राचीन मंदिर का उल्लेख मिलता है। भगवान विष्णु के 108 ‘दिव्य देशम’ में शामिल यह मंदिर उत्तर भारतीय ‘देउला’ वास्तुकला शैली का बेहतरीन नमूना है।‌ इतिहासकारों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का मूल जीर्णोद्धार 8वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा कराया गया माना जाता है। वहीं, इसकी वर्तमान भव्य संरचना का निर्माण कार्य जम्मू-कश्मीर के महाराजा गुलाब सिंह ने शुरू करवाया था, जिसे 1860 में महाराजा रणबीर सिंह ने पूरा किया था।

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