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उत्तराखंड: अलकनंदा तट पर जीवंत हुई समुद्र मंथन की परंपरा, जिलासू चंडिका देवी की देवरा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के
कर्णप्रयाग (चमोली) क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना के साथ आयोजित जिलासू चंडिका देवी की नौ माह लंबी देवरा यात्रा के दौरान शुक्रवार को एक भव्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ।

भव्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कालेश्वर में अलकनंदा नदी के तट पर पौराणिक ‘समुद्र मंथन’ की परंपरा का विधान पूरी श्रद्धा के साथ निभाया गया। जिसमें नदी किनारे मंदराचल पर्वत और वासुकी नाग के प्रतीकों के बीच देव और दानव पक्षों ने मंथन किया। अंत में अमृत और गंगा जल प्राप्त होने पर इसे श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। चैत्र नवरात्र और 13 साल बाद हो रहे इस आयोजन के कारण बारिश के बावजूद 27 गाँवों के सैकड़ों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
इस मौके पर यात्रा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि देवी 2 अक्टूबर को गर्भगृह से बाहर आई थीं। 13 साल के अंतराल पर हो रही यह भ्रमण यात्रा अगले नौ महीनों तक जारी रहेगी।

उमड़ा जनसैलाब

​समुद्र मंथन के दौरान पूरा क्षेत्र चंडिका देवी के जयकारों से गुंजायमान रहा। अब सिवाई और जिलासू में देवी के आगमन पर विशेष पूजा और देवी जागरण के भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

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