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उत्तराखंड: मसूरी में धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया जनजातीय बग्वाली पर्व, लोक संस्कृति, गीत-संगीत, परिधान और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की रहीं गूंज

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के मसूरी में धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ बग्वाली पर्व मनाया गया।

पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते कल रविवार को अगलाड़ यमुना घाटी विकास मंच की ओर से मसूरी में बग्वाल (बूढ़ी दीपावली) पारंपरिक तरीके से मनाई गई। इस मौके पर लोक संस्कृति, गीत-संगीत, परिधान और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज का उत्सव दिखा। डिबसा की अग्नि के चारों ओर युवा, बुजुर्ग और महिलाएं रासौ, तांदी और सराई नृत्य करती दिखाई दी। परंपरागत वाद्ययंत्रों की ताल पर कदम मिलाते हुए सभी लोकगीतों में झूमते नजर आए।

दिखा खासा उत्साह

दरअसल दीपावली के एक माह बाद जौनपुर रंवाई, जौनसार सहित कुछ अन्य हिस्सों में दीपावली मनाई जाती है। बग्वाल यानी बूढ़ी दीपावली 20 नवंबर से शुरू होगी जो पांच दिन चलती है, लेकिन मसूरी में मंच की ओर से 16 नवंबर को सार्वजनिक बग्वाल कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कई प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा डिबसा (होलियात) का परंपरागत प्रज्ज्वलन रहा। डिबसा पूजन के साथ होलियात खेली गई और अखरोट की भिरूड़ी वितरण के बाद महिलाओं और पुरुषों के बीच रस्साकसी का मुकाबला हुआ।

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