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उत्तराखंड: वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन हब बन रहा शिव- पार्वती का विवाह स्थल त्रिजुगीनारायण मंदिर, महाशिवरात्रि पर शादी के बंधन में बंधे इतने जोड़े

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है शिव- पार्वती का विवाह स्थल त्रिजुगीनारायण मंदिर। यह मंदिर भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यह मंदिर अपनी दिव्य धार्मिक मान्यताओं, अनूठी स्थापत्य शैली, और अखंड धूनी (शाश्वत अग्नि) के लिए जाना जाता है।

बड़ी संख्या में पंहुचे श्रद्धालु

बीते कल महाशिवरात्रि के पर्व पर यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शनों को पहुंचे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वहीं इस शुभ मुहूर्त पर 15 नवयुगल शादी के बंधन में बंधे। जिसमें उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के साथ ही दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, बंगाल से नवयुगल इस पवित्र स्थान पर पहुंचे और महाशिवरात्रि पर शादी के बंधन में बंधे। इस संबंध में तीर्थ पुरोहित समिति त्रियुगीनारायण के सचिव सर्वेशानंद भट्ट ने बताया कि महाशिवरात्रि पर 15 नवयुगल शादी के बंधन में बंधे। वहीं श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होने से पर्यटन व्यवसायियों के चेहरों पर रौनक रही।

भगवान शिव और देवी पार्वती का संपन्न हुआ था विवाह

त्रिजुगीनारायण मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रियुगीनारायण मंदिर वह स्थान है जहाँ देवताओं ने स्वयं भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का उत्सव मनाया था। माना जाता है कि मंदिर में अखंड ज्योति उनकी शादी के समय जलाई गई थी और यह दिव्य आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में जलती रहती है। स्वयं भगवान विष्णु ने इस विवाह में देवी पार्वती के भाई (कन्यादान कर्ता) का कर्तव्य निभाया था। मंदिर में सदियों से जल रही अखंड धूनी (शाश्वत अग्नि) है, जो मंदिर के धार्मिक महत्व को और भी बढ़ाती है और भक्तों को आकर्षित करती है।

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