उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है शिव- पार्वती का विवाह स्थल त्रिजुगीनारायण मंदिर। यह मंदिर भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यह मंदिर अपनी दिव्य धार्मिक मान्यताओं, अनूठी स्थापत्य शैली, और अखंड धूनी (शाश्वत अग्नि) के लिए जाना जाता है।
त्रिजुगीनारायण मंदिर में बड़ी संख्या विवाह को पंहुच रहें लोग
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मंदिर वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर उभर रहा है। जहां देश विदेश से लोग सनातन परम्पराओं के अनुसार विवाह करने के लिए पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां स्थित पौराणिक त्रियुगीनारायण मंदिर में इस साल अब तक देशभर के 300 युवा जोड़े विवाह बंधन में बंध चुके हैं। इससे स्थानीय लोगों की आर्थिकी को भी मजबूती मिली है। त्रियुगीनारायण में हो रही शादियों से क्षेत्र के होटल व होम स्टे कारोबार में तो उछाल आया ही है, पुजारी समुदाय, परिवहन व बैंड कारोबारियों और पुष्प व्यवसायियों के भी चेहरे खिले हुए हैं। इस संबंध में त्रियुगीनारायण पुरोहित समिति के अध्यक्ष सच्चिदानंद पंचपुरी ने बताया कि वर्ष 2022 में यहां विवाह पंजीकरण व्यवस्था शुरू की गई थी। इसके बाद से लगातार विवाहों की संख्या बढ़ने लगी और बीते चार वर्षों में यहां 750 जोड़े परिणय सूत्र में बंध चुके हैं।
• वर्ष, कुल विवाह
• 2022, 50
• 2023, 200
• 2024, 200
• 2025, 300 (अब तक)
भगवान शिव और देवी पार्वती का संपन्न हुआ था विवाह
त्रिजुगीनारायण मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रियुगीनारायण मंदिर वह स्थान है जहाँ देवताओं ने स्वयं भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का उत्सव मनाया था। माना जाता है कि मंदिर में अखंड ज्योति उनकी शादी के समय जलाई गई थी और यह दिव्य आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में जलती रहती है। स्वयं भगवान विष्णु ने इस विवाह में देवी पार्वती के भाई (कन्यादान कर्ता) का कर्तव्य निभाया था। मंदिर में सदियों से जल रही अखंड धूनी (शाश्वत अग्नि) है, जो मंदिर के धार्मिक महत्व को और भी बढ़ाती है और भक्तों को आकर्षित करती है।