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उत्तराखंड: इस ऐप से होगा गढ़वाली-कुमाऊंनी में संवाद, चारधाम यात्रियों के लिए वरदान बनेगी डिजिटल तकनीक, जानें

उत्तराखंड: उत्तराखंड आने वाले देश-विदेश के लाखों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए अब भाषा की दीवार आड़े नहीं आएगी।

मिलेगी यह‌‌ सुविधा

इसके लिए केंद्र सरकार के ‘भाषिणी वाइस ऐप’ के जरिए अब स्थानीय लोग और बाहरी राज्यों से आए पर्यटक एक-दूसरे की भाषा को आसानी से समझ सकेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तराखंड के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) विभाग ने इस ऐप में देश की 22 आधिकारिक भाषाओं के साथ-साथ राज्य की प्रमुख बोलियों—गढ़वाली और कुमाऊंनी को भी शामिल किया है। यह पूरी तरह से वाइस-बेस्ड (आवाज पर आधारित) ऐप है, जो मुख्य रूप से चार अत्याधुनिक तकनीकों पर काम करता है।
• ​ऑटोमेटिक स्पीच रिकग्निशन: आपकी बोली गई बात को तुरंत टेक्स्ट (लिखे हुए शब्दों) में बदलना।
• ​न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन: एक भाषा या बोली से दूसरी भाषा में सटीक अनुवाद करना।
• ​टेक्स्ट टू स्पीच: लिखे हुए अनुवादित शब्दों को आवाज (स्पीकर) में बदलकर सुनाना।
• ​ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR): लिखे हुए दस्तावेजों या बोर्ड को स्कैन कर अनुवाद करने की सुविधा।

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