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25 साल का हुआ उत्तराखंड, राज्य आंदोलनकारियों के कठोर परिश्रम, संघर्ष, त्याग, बलिदान से मिला यह राज्य, यूंही नहीं कहलाता देवभूमि- ललित बिष्ट लमकोटी, नैनीताल

आज 09 नवंबर 2025 को हम अपना 25वां उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस मना रहे हैं। जो रजत जयंती उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर सभी राज्य आंदोलनकारी शहीदों और राज्य आंदोलनकारी भाई बहनों व राज्य आंदोलनकारी माताओं को नमन, जिनके कठोर परिश्रम, संघर्ष, त्याग के फलस्वरूप हमें यह राज्य मिला। सभी उत्तराखंड वासियों को 25 वें राज्य स्थापना दिवस की बधाई और शुभकामनाएं। आज हमारा राज्य 25 साल का युवा प्रदेश हो गया है पर क्या जैसे राज्य की परिकल्पना हमारे राज्य आंदोलनकारियों द्वारा की गई थी, क्या यह प्रदेश उनकी आकांक्षा के अनुरूप खरा उतर पाया, क्या हम सब ने इस राज्य के विकास में कुछ सहयोग दिया है, क्या अपनी जिम्मेदारी समझी है, या बस नाम मात्र के लिए रजत जयंती मना रहे हैं, यह एक सोचनीय विषय है।

उत्तराखंड से पलायन रोकना बेहद जरूरी

उत्तराखंड के जल, जंगल जमीन हमारे  पहाड़ उत्तराखंड की शान हैं। उत्तराखंड का जब भी नाम आता है तो हमारे दिमाग में सबसे पहले पहाड़ की छवि आती है, जो आज खाली होते जा रहे हैं, लोग यहां से पलायन कर रहे हैं, कोई रोजगार के लिए तो किसी ने अपनी जमीन बाहरी लोगों को बेचकर मैदान में जाकर बस रहे हैं। पलायन रुकने का नाम नहीं ले रहा है क्यों कि रोजगार है नहीं, खेती कर रहे हैं तो जंगली जानवरों से नुकसान, कभी दैवीय आपदा, जिस कारण पलायन करना पहाड़ वासियों की मजबूरी हो गई है। इन सबके निदान के लिए हमारे जिम्मेदार जन प्रतिनिधियों, नेता मंत्रियों, अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हम सभी  जिम्मेदार नागरिकों को आगे आना होगा और किसी न किसी रूप में इस राज्य के विकास में सहयोग करना होगा, हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, सिर्फ यह कह कर कि ये काम सरकार का है ये फलाने विभाग का है या ये उस प्रतिनिधि का है या ये उस अधिकारी का है ये कह कर एक दूसरे पर टाल नहीं सकते। क्योंकि यह राज्य हम सबका है, जहां कुछ गलत हो रहा है तो वहां पर आवाज उठानी पड़ेगी, उसे टोकना होगा कि यहां पर गलत हो रहा है। जहां पर किसी को हमारी जरूरत है वहां पर हर संभव सहयोग करना पड़ेगा। राज्य के विकास के लिए किसी न किसी रूप में सहयोग करना है, जैसे जल जंगल जमीन को बचाने, पर्यावरण संरक्षण, के मामले में अपने अपने जन प्रतिनिधियों से निदान करवाने आदि। हम सभी को अपना अपना कार्य जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ निभाना होगा तभी हमारे राज्य आंदोलन कारी भाई बहनों के सपनों उनकी परिकल्पना के अनुरूप यह उत्तराखंड राज्य विकास कर पाएगा तभी खुशहाल प्रदेश कहलाएगा। तभी सही मायनों में हम सबके सपनों  के खुशहाल विकसित राज्य उत्तराखंड का नाम देश ही नहीं विश्व के पटल पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित करवा पाएंगे।  आइए हम सब मिलकर अपने प्यारे उत्तराखंड के विकास में भागीदार बने। सादर प्रणाम, पैलाग, नमस्कार ललित बिष्ट लमकोटी, नैनीताल, उत्तराखंड।                 जय हिंद। जय भारत। जय देवभूमि। जय उत्तराखंड।

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