Site icon Khabribox

उत्तराखंड: वनाग्नि के खिलाफ उत्तराखंड वन विभाग का ‘मिशन जीरो’, अब उन इलाकों पर भी रहेगी नजर जहां से सामने नहीं आई आग की घटनाएं

​उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के जंगलों को आग की घटनाओं से बचाने के लिए वन विभाग ने इस वर्ष अपनी रणनीति में खास परिवर्तन किया है।

आधुनिक डेटा विश्लेषण पर जोर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विभाग अब केवल उन्हीं इलाकों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहा है जो ‘फायर प्रोन’ (अति संवेदनशील) माने जाते हैं, बल्कि उन क्षेत्रों की भी घेराबंदी की जा रही है जहाँ पहले कभी आग की घटनाएं दर्ज नहीं हुई हैं। इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक सुशांत पटनायक के नेतृत्व में विभाग अब पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक डेटा विश्लेषण पर जोर दे रहा है। विभाग का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम के कारण अब वे इलाके भी सुरक्षित नहीं हैं, जो पहले कम संवेदनशील माने जाते थे।

नई रणनीति के मुख्य बिंदु:

• ​नया डेटा बैंक: उन क्षेत्रों की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है जहाँ पहले आग की घटनाएं नगण्य रही हैं।
• ​बहु-आयामी विश्लेषण: संभावित खतरे का आकलन करने के लिए इलाके की ऊंचाई, तापमान, वर्षा का पैटर्न, जमीन की ढाल और वनस्पति जैसे कारकों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है।
• ​संसाधनों का सटीक प्रबंधन: नया वनाग्नि मैप तैयार होने से मैनपावर और उपकरणों को उन जगहों पर भी तैनात किया जा सकेगा जहाँ अचानक आग लगने का खतरा हो।
• विभाग का लक्ष्य: आग को केवल बुझाना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां पैदा करना है कि आग लगने की नौबत ही न आए। इसके लिए फील्ड स्तर पर गश्त और तकनीकी निगरानी को दोगुना कर दिया गया है।

देखें यह आंकड़े

रिपोर्ट्स के मुताबिक 15 फरवरी के बाद गढ़वाल क्षेत्र में 82 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि वन्यजीव क्षेत्रों में केवल 4 मामले सामने आए हैं। कुमाऊं क्षेत्र में अब तक एक भी घटना दर्ज नहीं हुई है, जो विभाग की तैयारी और सतर्कता का परिणाम माना जा रहा है।

Exit mobile version