Site icon Khabribox

25 अगस्त: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है विष्णु का तीसरा अवतार वराह अवतार, जानें कैसे श्रीहरि ने बचाई थी पृथ्वी

आज 13 सितंबर 2026 है। आज वराह जयंती है। वराह जयंती आज 13 सितंबर को मनाई जाएगी। वराह जयंती, भगवान विष्णु के वराह अवतार के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ती है। वराह जयंती भगवान विष्णु के तीसरे अवतार, वराह (सूअर) के रूप में जन्म का उत्सव है। वराह अवतार त्याग और सेवा का भी प्रतीक है, क्योंकि उन्होंने पृथ्वी को बचाने के लिए अपने आराम और शक्ति का त्याग किया।

भगवान विष्णु का वराह अवतार

वराह अवतार, भगवान विष्णु का तीसरा अवतार है, जो सूअर के रूप में है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब हिरण्याक्ष नामक राक्षस ने पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण किया और पृथ्वी को बचाया। मान्यता के अनुसार पौराणिक कथा में एक बार, हिरण्याक्ष नामक एक शक्तिशाली राक्षस ने पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया था। इससे परेशान होकर, ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि वे पृथ्वी को बचाएं। भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण किया, जो एक विशाल सूअर था, और समुद्र में प्रवेश किया। वराह ने हिरण्याक्ष को ढूंढ निकाला और दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। जिसमें वराह ने हिरण्याक्ष को मारकर पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाकर समुद्र से बाहर निकाला‌। फिर, उन्होंने पृथ्वी को ब्रह्मांड में उसके उचित स्थान पर स्थापित किया।

जानें पूजन विधि

इस दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु और वराह स्वरूप की पूजा की जाती है। कई भक्त इस दिन व्रत भी रखते हैं। इस दिन श्रीमद्भागवत पुराण के तीसरे स्कंध का पाठ करने से विशेष फल और शांति मिलती है। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आध्यात्मिक शांति आती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण कर पृथ्वी को रसातल (समुद्र की गहराई) से निकालकर उसकी रक्षा की थी। यह पर्व प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।

Exit mobile version