आज 02 जुलाई 2025 है। आज आषाढ माह की गुप्त नवरात्रि का सातवां दिन हैं। गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन मां धूमावती की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में नवरात्रि को सनातन धर्म का सबसे पवित्र और ऊर्जादायक पर्व माना जाता है। सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं जो माघ, चैत्र, आषाढ़, अश्विन (शारदीय नवरात्रि) मास में होती हैं। जिसमें से दो गुप्त और दो सार्वजनिक होती हैं। आषाढ़ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।
मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष साधना
गुप्त नवरात्रि में देवी के दस शक्तिस्वरूपों – काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला – की विशेष साधना की जाती है।
जानें पौराणिक मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब माता सती ने अपने पति भगवान शिव के अपमान होने के कारण अपने पिता राजा प्रजापति द्वारा आयोजित हवन कुंड में अपनी इच्छा अपने आप को जलाकर भस्म कर दिया था। माना जाता है कि तब उनके शरीर से जो धुआं निकला था उसी धुंए से मां धूमावती प्रकट हुई थी। अर्थात मां धूमावती धुंए के स्वरूप में माता सती का भौतिक रूप है। मां धूमावती को दुख दूर करने वाली देवी भी माना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार यह भी बताया गया है कि दुर्भाग्य की देवी धूमावती मां लक्ष्मी की बड़ी बहन है। परंतु इनका स्वरूप मां लक्ष्मी से बिल्कुल उल्टा है। शास्त्रों के अनुसार मां धूमावती पीपल के पेड़ में निवास करती हैं। मान्यताओं के अनुसार धूमावती को दरिद्रता, अलक्ष्मी और ज्येष्ठा के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पाप, आलस्य, गरीबी, दुख और कुरूपता पर मां धूमावती का आधिपत्य रहता है।
इस तरह करें गुप्त नवरात्रि में पूजा अराधना
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की विधिवत पूजा-पाठ के साथ अराधना करें। सुबह और संध्या पूजा के समय दुर्गा चालीसा अथवा दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करें। पूजा के दौरान माता को लोंग व बताशे का भोग चढ़ाना चाहिए। इसके साथ मां को लाल पुष्प और चुनरी भी अर्पित करें। इससे माता जल्दी प्रसन्न हो