11 अगस्त: भारत के सबसे कम उम्र के शहीद क्रांतिकारी खुदीराम बोस, जिनके बेबाक शब्दों ने उड़ा दिए थे अंग्रेजों के होश

आज 11 अगस्त 2025 है। आज ही के दिन भारत के सबसे उम्र के शहीद क्रांतिकारी खुदीराम बोस को फांसी दी गई थी। उन्हें आजादी की लड़ाई में फांसी पर चढ़ने वाला सबसे कम उम्र का क्रांतिकारी माना जाता है।

जानें इनके बारे में

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुदीराम का जन्म बंगाल में मिदनापुर के हबीबपुर गांव में 3 दिसंबर 1889 को हुआ था। महज 9वीं कक्षा की पढ़ाई के बाद उन्होंने स्कूल छोड़ दिया था। इसके बाद वे रिवॉल्यूशनरी पार्टी के सदस्य बने और वंदे मातरम् के पर्चे बांटने में बड़ी भूमिका निभाई। जिसके बाद 1905 में बंगाल का विभाजन होने के बाद खुदीराम बोस ने सत्‍येंद्रनाथ बोस के नेतृत्व में अपने क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत की थी। 1905 में लॉर्ड कर्जन ने जब बंगाल का विभाजन किया तो उसके विरोध में सड़कों पर उतरे अनेकों भारतीयों को उस समय के कलकत्ता के मॅजिस्ट्रेट किंग्जफोर्ड ने क्रूर दण्ड दिया। अन्य मामलों में भी उसने क्रान्तिकारियों को बहुत कष्ट दिया था। इसके परिणामस्वरूप किंग्जफोर्ड को पदोन्नति देकर मुजफ्फरपुर में सत्र न्यायाधीश के पद पर भेजा। ‘युगान्तर’ समिति कि एक गुप्त बैठक में किंग्जफोर्ड को ही मारने का निश्चय हुआ। इस कार्य हेतु खुदीराम तथा प्रफुल्लकुमार चाकी का चयन किया गया। खुदीराम को एक बम और पिस्तौल दी गयी। प्रफुल्लकुमार को भी एक पिस्तौल दी गयी। मुजफ्फरपुर में आने पर इन दोनों ने सबसे पहले किंग्जफोर्ड के बँगले की निगरानी की। उन्होंने उसकी बग्घी तथा उसके घोडे का रंग देख लिया। खुदीराम तो किंग्जफोर्ड को उसके कार्यालय में जाकर ठीक से देख भी आए। 30 अप्रैल 1908 को, खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने वर्तमान बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में कलकत्ता के मुख्य प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट डगलस किंग्सफोर्ड की गाड़ी पर बम फेंका। इस घटना में किंग्सफोर्ड की जान बच गई, लेकिन गाड़ी में सवार दो महिलाओं की मौत हो गई।

दी थी फांसी की सजा

रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी घटना के बाद खुदीराम बोस को 1 मई 1908 को गिरफ्तार कर लिया गया था। हत्या के इस मुकदमे के बाद अदालत ने खुदीराम को फांसी की सजा सुनाई। 11 अगस्त 1908 को उन्हें मुजफ्फरपुर जेल में फांसी दे दी गई।