आज 13 जुलाई 2024 है। आज आषाढ माह की गुप्त नवरात्रि का आठवां दिन और सप्तमी है। गुप्त नवरात्रि के आठवें दिन मां बगलामुखी की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में नवरात्रि को सनातन धर्म का सबसे पवित्र और ऊर्जादायक पर्व माना जाता है। सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं जो माघ, चैत्र, आषाढ़, अश्विन (शारदीय नवरात्रि) मास में होती हैं। जिसमें से दो गुप्त और दो सार्वजनिक होती हैं। आषाढ़ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।
गुप्त नवरात्रि
आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन नौ दिनों में तंत्र साधना करने वाले लोग माँ भगवती के दस महाविद्याओं की पूजा को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होंगी, फल उतना ही सुखदायी होगा। मान्यता है कि भक्त आषाढ़ नवरात्रि में गुप्त रूप से आदि शक्ति देवी दुर्गा की उपासना करते हैं उनके जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता है ।
घी का जलाएं दीपक
गुप्त नवरात्रि के आठवें दिन मां बगलामुखी की पूजा होती है। उनकी पूजा में घी का दीपक जलाना सबसे शुभ माना जाता है। घी को शुद्ध और पवित्र माना गया है और देवी-देवताओं का प्रिय भोग भी। मां बगलामुखी को ज्ञान, वाणी और विजय की देवी माना गया है। उनकी पूजा में घी का दीपक जलाने से मां प्रसन्न होती हैं और अपनी कृपा बरसाती हैं।
जानें पौराणिक मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार माता बगलामुखी का प्रकट स्थल गुजरात का सौराष्ट्र को माना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है की सौराष्ट्र में आये तूफान को शान्त करने के लिये भगवान विष्णु ने मां बगलामुखी की तपस्या की थी। भगवान् विष्णु के द्वारा की गयी तपस्या के फलस्वरुप मां बगलामुखी प्रकट हुईं थीं। महाविद्या की पूजा रात्रि काल में करना अत्यंत लाभदायक होता है। मां बगलामुखी को पीला रंग बहुत प्रिय है इसलिए मां की पूजा करते समय भक्तों को विशेष रूप से पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।
इस तरह करें गुप्त नवरात्रि में पूजा अराधना
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की विधिवत पूजा-पाठ के साथ अराधना करें। सुबह और संध्या पूजा के समय दुर्गा चालीसा अथवा दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करें। पूजा के दौरान माता को लोंग व बताशे का भोग चढ़ाना चाहिए। इसके साथ मां को लाल पुष्प और चुनरी भी अर्पित करें। इससे माता जल्दी प्रसन्न हो जाती है। और आपके ऊपर अपनी कृपा बनाए रखती है।