15 दिसंबर: आज मनाई जाती है त्रीपुर भैरवी जयंती, मानी जाती है मां काली का स्वरूप 

आज 15 दिसंबर 2024 है। आज त्रीपुर भैरवी जयंती है। त्रिपुर भैरवी जयंती, मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस साल 2024 में यह जयंती 15 दिसंबर यानी आज रविवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, त्रिपुर भैरवी को मां काली का स्वरूप माना जाता है। मां त्रिपुर भैरवी 10 महाविद्याओं में से छठी महाविद्या है जो सौम्य कोटि की देवी मानी जाती है।

जानें मां भैरवी का स्वरूप

माता भैरवी को कालिका ही स्वरूप माना जाता है। इन्हें ही त्रिपुर भैरवी भी कहा जाता है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार देवी त्रिपुर भैरवी ने ही महिषासुर नामक दैत्य का वध किया था। कहते हैं कि देवी त्रिपुर भैरवी का संबंध महादेव के उग्र स्वरूप काल भैरव से है। मां भैरवी की चार भुजाएं और तीन नेत्र हैं। उनके बाल खुले हुए रहते हैं। वे लाल वस्त्र पहने हुए मां मुंड माला धारण करती हैं। कालभैरव की तरह उन्हें भी दंडाधिकारी कहा जाता है। श्मशान भूमि, अस्त्र शस्त्र, मृत शव, रक्त, मांस, कंकाल, खप्पर, आदि विध्वंसकारी चीजें देवी को प्रिय हैं। भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी, भैरव, कुत्ते आदि उनकी सेना हैं। 

त्रिपुर भैरवी जयंती पर विधि-विधान से माँ की पूजा करने का विशेष महत्व

📌📌शुद्धिकरण: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ-सुथरा करके गंगाजल से शुद्ध करें।
📌📌स्थापना: एक चौकी पर माँ त्रिपुर भैरवी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। चौकी को शुद्ध कपड़े से ढकें।
📌📌आवरण: माँ को शुद्ध वस्त्र चढ़ाएं। लाल रंग के वस्त्र माँ को प्रिय हैं।
📌📌पूजन सामग्री: फूल, फल, मिठाई, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पूजन सामग्री अर्पित करें।
📌📌आरती और मंत्र जाप: माँ की आरती गाएं और उनके मंत्रों का जाप करें।
📌📌प्रार्थना: मन की भावनाओं के साथ माँ से अपनी मनोकामनाएं प्रकट करें।