20 दिसंबर: हनुमान जी के‌ अवतार बाबा नीब करौरी महाराज जी का जन्मोत्सव आज, जन्मस्थली अकबरपुर आश्रम उत्तरप्रदेश में होता है भव्य आयोजन

आज 20 दिसंबर है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर बाबा नीब करौरी महाराज जी का जन्म हुआ था। बाबा नीब करौरी का जन्म अकबरपुर, उत्तरप्रदेश में हुआ था। बाबा नीब करौरी महाराज जी का असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। आज भगवान हनुमान जी के अवतार बाबा नीब करौरी महाराज का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। देवभूमि उत्तराखंड के नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर बना एक आश्रम नीब करौरी बाबा आश्रम के नाम से जाना जाता है। बाबा नीब करौरी महाराज का यह धाम पूरे विश्व में विख्यात है। देश दुनिया से भक्त इस धाम में दर्शन करने आते है।

जन्मस्थली अकबरपुर आश्रम में होगा भव्य आयोजन

आज समस्त भक्त दर्शन कर बाबा नीब करौरी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आज के दिन नीब करौरी बाबा के जन्मोत्सव की समस्त तैयारी व प्रसाद वितरण बाबा जी की जन्मस्थली अकबरपुर आश्रम (फिरोजाबाद, उत्तरप्रदेश) में ही उनके परिवारजनों व भक्तों के द्वारा सम्पन्न कराई जाती है। इस अवसर पर मंदिर में आज भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

उत्तरप्रदेश में हुआ जन्म

नीब करौरी बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। उत्तरप्रदेश के अकबरपुर गांव में उनका जन्म 1900 के आसपास हुआ था। 17 वर्ष की उम्र में ही उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी। उनके पिता का नाम दुर्गा प्रसाद शर्मा था। 11 वर्ष की उम्र में ही बाबा का विवाह हो गया था। 1958 में बाबा ने अपने घर को त्याग दिया और पूरे उत्तर भारत में साधुओं की भांति विचरण करने लगे थे। उस दौरान लक्ष्मण दास, हांडी वाले बाबा और तिकोनिया वाले बाबा सहित वे कई नामों से जाने जाते थे। गुजरात के ववानिया मोरबी में तपस्या की तो वहां उन्हें तलईया बाबा के नाम से पुकारते लगे थे। उत्तराखंड के नैनीताल के पास कैंची धाम में बाबा नीब करौरी 1961 में पहली बार यहां आए और उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिलकर यहां आश्रम बनाने का विचार किया था। बाबा नीब करौरी ने इस आश्रम की स्थापना 1964 में की थी। नीब करौरी बाबा का समाधि स्थल नैनीताल के पास पंतनगर में है। यह एक ऐसी जगह है जहां कोई भी मुराद लेकर जाए तो वह खाली हाथ नहीं लौटता। यहां बाबा का समाधि स्थल भी है। यहां बाबा नीब करौरी की भी एक भव्य मूर्ति स्थापित की गयी है। यहां हनुमानजी की मूर्ति भी है। 15 जून को देवभूमि कैंची धाम में मेले का आयोजन होता है और यहां पर देश-विदेश से बाबा नीब करौरी के भक्त आते हैं। इस धाम में बाबा नीम करौली को भगवान हनुमान का अवतार माना जाता है। देश-विदेश से हजारों भक्त यहां हनुमान जी का आशीर्वाद लेने आते हैं। बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मन्दिर बनवाया। यहां 5 देवी-देवताओं के मंदिर हैं। इनमें हनुमानजी का भी एक मंदिर है। बाबा नीब करौरी हनुमानजी के परम भक्त थे और उन्होंने देशभर में हनुमानजी के कई मंदिर बनवाए थे। बाबा ने 11 सितंबर, 1973 को वृंदावन में अपने शरीर का त्याग किया। बाबा नीब करौरी महाराज हमेशा कंबल ओड़ा करते थे। कैंची में आने वाले भक्त बाबा नीब करौरी महाराज को कंबल भी भेंट करते हैं। बाबा नीब करौरी के अलौकिक प्रसंग, मिरेकल आफ लव के अलावा अन्य कई किताबें बाबा पर लिखी जा चुकी हैं।

हनुमान जी के अवतार माने जाते हैं बाबा नीम करौरी महाराज

समुद्र तल से 1400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह आश्रम एकदम शांत, साफ-सुथरी जगह, हरियाली, सुकून वाली जगह पर बना ये आश्रम धर्मावलंबियों के बीच कैंची धाम के रूप में जाना जाता है। यह आश्रम बाबा नीब करौरी महाराज जी के समर्पण में बनाया गया है। बाबा नीब करौरी हिंदू आध्यात्मिक गुरु के रूप में पूजे जाने वाले और श्रीराम का नाम जपने वाले बाबा थे, वहीं कई लोग इन्हें हनुमान का अवतार भी मानते हैं। बाबा नीम करौरी जी हिंदू आध्यात्मिक गुरु के रूप में पूजे जाने वाले बाबा हनुमान जी के बहुत बड़े भक्त थे। उनको मानने वाले उन्हें हनुमान जी का ही अवतार मानते थे। वह हनुमान जी को अपना आराध्य मानते थे। बाबा जी ने अपने जीवन में लगभग 108 हनुमान मंदिर बनवाए। बाबा नीम करोली या नीब करौरी को 20वीं सदी के महान संतों में माना जाता है। जिन्होंने नैनीताल, भुवाली से 7 किलोमीटर दूर कैंची धाम आश्रम की स्थापना सन् 1964 में की थी। वे यहां पहली बार सन् 1961 में पहुंचे थे और जहां उन्होंने एक मित्र पूर्णानंद के साथ आश्रम बनाने का विचार किया था। बाबा नीम करोली की उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी इनके चमत्कारों की चर्चा होती है।