अल्मोड़ा से जुड़ी खबर सामने आई है। अल्मोड़ा में न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभांगी गुप्ता की अदालत ने मारपीट के मामले में देवकी देवी पत्नी गंगा सिंह, माया राणा पुत्री पूरन सिंह राणा को दोषमुक्त किया। वादी की लिखित तहरीर के आधार पर राजस्व पुलिस क्षेत्र- कोटुली में मुकदमा अपराध संख्या-02/2022, अन्तर्गत धारा 323, 452, 504, 506 भा०द०सं० बनाम देवकी देवी व एक अन्य में अभियोग पंजीकृत किया गया। अभियुक्तगणों के विद्वान अधिवक्ता मो0 इमरोज रहे।
जाने पूरा मामला
अभियोजन कथानक इस प्रकार है कि वादी मुकदमा विनोद महरा पुत्र स्व० लाल सिंह द्वारा दिनांक 07.06.2022 को नायब तहसीलदार, तहसील भनोली, अल्मोड़ा को इस आशय की लिखित तहरीर दी गई कि दिनांक 05.06.2022 को समय करीब दोपहर 3:30 बजे उसे धनुली देवी पत्नी किशन सिंह निवासी ग्राम कोटुली द्वारा फोन पर सूचित किया गया कि उक्त ग्राम कोटुली की कुछ महिलाओं द्वारा उसकी बहन पर जानलेवा हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया तथा वह मूर्छित पड़ी है। तब वह अपनी बहन को उपचार हेतु जिला चिकित्सालय अल्मोड़ा लाया। इमरजेंसी में दिखाने के बाद जब उसकी बहन पूरी तरह होश में आई तो उसने उसे बताया कि उसके पड़ोस की दो महिलाएं देवकी देवी व माया दिनांक 05.06.2022 को समय लगभग 2:30 बजे दोपहर उसके घर में जबरदस्ती घुसे तथा लकड़ी व पत्थर से उसके साथ मारपीट की व उसे गन्दी गन्दी गालियां दीं। बाद में गांव की महिलाओं द्वारा उसे बचाया। जाते-जाते उक्त महिलाएं दराती से उसकी बहन को जान से मारने की धमकी दे गई।
किया दोषमुक्त
अभियुक्तगण की ओर से उनके अधिवक्ता मो० इमरोज द्वारा बहस के दौरान कथन किया गया कि प्रस्तुत मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने में एक दिन का विलम्ब है। समस्त गवाहों के बयानों में घोर विरोधाभास उत्पन्न होता है। पी. डब्ल्यू 1 विनोद महरा है 9/17 अपनी प्रतिपरीक्षा में पटवारी को तहरीर देना बताया गया है जबकि तहरीर के अवलोकन से स्पष्ट है कि उक्त शिकायत तहसीलदार को दी गई है। इसके अतिरिक्त पी.डब्ल्यू-2 पीड़िता बीना राणा खुद को खुले घाव के साथ समस्त चोटें आना बताती हैं। जबकि डॉक्टर द्वारा अपने बयानों में स्वयं कथन किया गया है कि कोई खुली चोट नहीं पाई गई और न ही रक्त पाया गया, ऐसी परिस्थिति में अभियुक्तगण के विरूद्ध लगाये गये आरोप कदापि साबित नहीं होते हैं। अतः अभियुक्तगण को दोषमुक्त किये जाने की कृपा करें।
कोर्ट का आदेश
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की सुनवाई करते हुए साक्ष्यों का परिशीलन कर आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है।