अल्मोड़ा से जुड़ी खबर सामने आई है। अल्मोड़ा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल ने प्रेस को एक बयान जारी किया।
जारी बयान में कहीं यह बात
जिसमें उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने गैरसैंण की घोर उपेक्षा की है। गैरसैंण की उपेक्षा करना पहाड़ की उपेक्षा है। आज कई मायनों में हमारे विभागों की स्थिति, उत्तर प्रदेश में जब हम थे, उससे भी बत्तर हो गई है। विशेष रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की हालत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। कहा कि मैं शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री से अनुरोध करता हूं जब आपने इन विभागों को संभाला था उस समय समाचार पत्रों में जो बयान आपका छपा था, उसे याद करने की कोशिश करें। इस समय शिक्षा विभाग में दो चार प्रधानाचार्य के अलावा इंटर कालेजों में सारे पद खाली हैं। विद्यालय के कर्मचारियों को वेतन बिल को पास कराने के लिए दूसरे ब्लॉकों में जाना पड़ रहा है। अध्यापकों के भी सैकड़ों पद खाली पड़े हुए हैं। इन पदों को भरने की कार्यवाही नहीं की जा रही है। पढ़ाई चौपट है। एक प्रकार से पहाड़ के विद्यालयों में पढ़ाई का माहौल ही समाप्त हो चुका है। प्राइमरी और जूनियर का हाल और ज्यादा खराब है। अध्यापकों की कमी इनमें भी ज्यादा है। आज स्थिति यह है प्राइमरी और जूनियर के अधिकांश अध्यापक जिस विद्यालय में नियुक्त हैं वो भी अपने बच्चों को इन सरकारी विद्यालयों में पढ़ाना उचित नहीं समझ रहे हैं, जो आसपास में प्राइवेट विद्यालय खुले हैं वहां इनके बच्चे पड़ रहे हैं।
कहा- सरकार को पलायन होने का कारण खोजने की जरूरत
उत्तराखंड राज्य को बने हुए 25 साल हो रहे हैं और इन 25 सालों में अगर उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को ही सरकार ठीक नहीं कर पाई तो फिर पहाड़ का पलायन होना ही था। आज भी लगातार शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाली के कारण ही पहाड़ के गांवो में लगातार ताले लगना यह हम सब राजनीतिक लोगों के लिए बहुत बड़ा चिंता का विषय है। आज उत्तर प्रदेश से भी ज्यादा उपेक्षा, भ्रष्टाचार ,विभागीय बजट का दुरुप्रयोग होना तथा विभागों द्वारा टेंडर करने के नियमों का पालन न किया जाना भी कहीं न कहीं पर जो स्थिति आज पहाड़ की है वो भी अपने आप में गंभीर मुद्दा है। सरकार को पलायन होने का कारण खोजने की जरूरत है। तब उसका समाधान निकाला जा सकता है। दुर्भाग्य यह है कि केवल पलायन आयोग का गठन करने से ही आपकी सरकार ने यह सोचा कि पलायन रुक जाएगा। आज की स्थिति आपके सामने है। मेरा यह मानना है अगर स्वास्थ्य व शिक्षा की व्यवस्था ठीक हो तो पलायन रुकेगा। पहाड़ में विभागों द्वारा काम भी नियमों के अन्तर्गत न होने से विभागीय बजट का दुरुप्रयोग भी सामने आ रहा है, जैसा कि इस उत्तराखण्ड में माहौल बना है। उससे ये लगता है कि विभागों द्वारा सरकारी बजट का खर्च नियमा अनुसार नहीं किया जा रहा है। कहीं कहीं पर तो विभाग के लोग राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने के लिए सारे नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।