01 दिसंबर: मोक्षदा एकादशी आज, पितरों की पूजा के लिए भी श्रेष्ठ, जानें मोक्षदा एकादशी का खास महत्व

आज 01 दिसंबर 2025 है। आज मोक्षदा एकादशी है। मोक्षदा एकादशी का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। ये दिन मोक्ष प्राप्ति के लिए सबसे खास माना जाता है। मोक्षदा एकादशी का व्रत भगवान विष्‍णु की पूजा के लिए बहुत खास माना जाता है। शास्त्रों में मोक्षदा को ‘मौना एकादशी’ या ‘मौन अग्यारस’ भी कहते हैं, यह तिथि पितरों की पूजा के लिए भी श्रेष्ठ होती है। इस दिन दान-दक्षिणा देने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।

जानें शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह व्रत 1 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा। मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और मोक्ष का मार्ग मिलता है। मोक्षदा एकादशी तिथि की शुरुआत रविवार 30 नवंबर को रात 9 बजकर 31 मिनट पर होगी और 1 दिसंबर को शाम 7 बजकर 1 मिनट पर तिथि का अंत होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा।

जानें मोक्षदा एकादशी का महत्व

इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को महाभारत के युद्ध से पहले श्रीमद्भागवत गीता का उपदेश भी दिया था। इस लिए इसे गीता जयन्ती के रूप में भी मनाया जाता है। गीता मात्र एक पुस्तक नहीं है बल्कि यह उपदेशों का जीवंत स्वरुप है अतः इसकी जयंती मनाई जाती है। इसके उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पूर्व में थे। मान्यता है कि इस दिन गीता के पाठ से मुक्ति मोक्ष और शान्ति का वरदान मिलता है। गीता के पाठ से जीवन की ज्ञात अज्ञात समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन उपवास रखकर श्रीहरि के नाम का कीर्तन, गीत करते हुए रात भर जागरण करें। मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने और गीता का पाठ करने से जन्म-मृत्यु के चक्कर से मुक्ति मिल जाती है और पूर्वजों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में मोक्षदा एकादशी की तुलना मणि चिंतामणि से की जाती है, जो सभी मनोकामनाओं को पूरी करती है।