उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। पद्मश्री से सम्मानित, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ट्रैवल राइटर और पर्यावरण संरक्षक ह्यूग गैंटजर का निधन हो गया है।
शोक की लहर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने दशकों तक मसूरी पहाड़ी शहर की सुंदरता, संवेदना और संघर्ष को दुनिया के सामने रखा। 94 वर्ष की आयु में ह्यूग गैंटजर ने किंक्रेग लाइब्रेरी रोड स्थित अपने आवास ओक ब्रुक में अंतिम सांस ली। ह्यूग गैंटजर का अंतिम संस्कार 4 फरवरी की सुबह कैमल्स बैक कब्रिस्तान में पारिवारिक प्लॉट पर किया जाएगा। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, साहित्यकारों और आम नागरिकों ने शोक जताया है। ह्यूग गैंटजर की जीवन संगिनी और लेखन सहयात्री कोलीन गैंटज़र का निधन 6 नवंबर 2024 को हुआ था। इस दंपति को ट्रैवल जर्नलिज्म के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
पत्नी, कोलीन की प्रेरणा से बने थे यात्रा वृतांत लेखक
रिपोर्ट्स के मुताबिक वह भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी थे और कमांडर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त होने के उपरांत इन्होंने और इनकी पत्नी कोलीन गैंट्जर ने भारतीय मोज़ेक के आकर्षणों की खोज करने का निर्णय लिया। ह्यूग गैंट्ज़र और उनकी पत्नी स्वर्गीय कोलीन गैंट्ज़र ने 3,000 से अधिक लेख, कॉलम और पत्रिका फीचर्स लिखे हैं और 30 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। गैंट्ज़र्स ने दूरदर्शन द्वारा पूरे भारत में प्रसारित होने वाले पहले यात्रा वृत्तचित्रों (डॉक्यूमेंटरीज) लूकिंग बियोंड विद ह्यूग एंड कोलीन गैंट्जर और टेक अ ब्रेक विद ह्यूग और कोलीन गैंट्ज़र का भी निर्माण किया।