अल्मोड़ा: पहाड़ों की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और स्वास्थ्य सुविधाओं की दूरी के कारण होने वाली मातृ एवं शिशु मृत्यु को रोकने के लिए अल्मोड़ा स्वास्थ्य विभाग ने एक ‘लाइफ-सेविंग’ पहल शुरू की है।
खास पहल
इसके तहत अब जनपद की हाई-रिस्क (उच्च जोखिम वाली) गर्भवती महिलाओं को आपात स्थिति में एयरलिफ्ट कर सीधे हायर सेंटर पहुँचाया जाएगा। जिले में पहली बार शुरू हुई इस हेली एम्बुलेंस सेवा को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच के कारण मातृ और शिशु मृत्यु दर एक बड़ी चुनौती रही है।
• मातृ मृत्यु दर: प्रति एक लाख महिलाओं पर 68.
• शुरु मृत्यु दर: प्रति हजार जन्म पर लगभग 5%. अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश मौतें उन दूरदराज के क्षेत्रों में होती हैं जहाँ समय पर इलाज न मिल पाने के कारण जच्चा-बच्चा की जान को खतरा पैदा हो जाता है।
एयरलिफ्ट की सुविध
प्रसव के दौरान गंभीर स्थिति होने पर गर्भवती महिला को निकटतम हेलीपैड से बड़े अस्पतालों (हायर सेंटर) तक हेलीकॉप्टर के जरिए पहुँचाया जाएगा।
नोडल अधिकारियों की तैनाती
इसयोजना के सुचारू संचालन और त्वरित रिस्पांस के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नोडल और सह-नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है, जो हर केस की निगरानी करेंगे। यह सुविधा उन क्षेत्रों में उपलब्ध रहेगी जहाँ नजदीकी हेलीपैड की व्यवस्था है। इस अभिनव पहल से ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा।
कही यह बात
इस संबंध में डॉ. प्रवीण कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), अल्मोड़ा ने बताया कि मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करना हमारा प्रमुख उद्देश्य है। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं। जिन क्षेत्रों में नजदीक में हेलीपैड उपलब्ध हैं, वहाँ यह सेवा प्राथमिकता से दी जाएगी ताकि आपात स्थिति में त्वरित उपचार संभव हो सके।