उत्तराखंड: उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के देहरादून में कालसी वन प्रभाग की चौहड़पुर रेंज में वन विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए विभिन्न रिहायशी इलाकों से कुल आठ बेहद जहरीले सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू किया है।
सांपों का रेस्क्यू
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सफल अभियान को चौहड़पुर रेंज के एक संविदा कर्मी (स्नेक कैचर) द्वारा अंजाम दिया गया, जिससे स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली है। बताया गया है कि वनविभाग को पिछले कुछ दिनों से रिहायशी इलाकों में सांप दिखने की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद अलग-अलग गांवों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। जिसमें ग्राम पंचायत छरबा, लाइन जीवनगढ़, रमसावाला, लखनवाला व हरबर्टपुर में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। पकड़े गए आठ सांपों में भारत की सबसे खतरनाक और विषैली प्रजातियों के सर्प शामिल हैं। रेस्क्यू किए गए सांपों में छह इंडियन स्पेक्टाकल्ड कोबरा और दो कॉमन करैत शामिल हैं। कॉमन करैत को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।
इंडियन कोबरा (नाग)
यह भारतीय उपमहाद्वीप का बेहद जहरीला सांप है। हालांकि, इसका जहर करैत जितना घातक नहीं होता और न ही यह रसेल्स वाइपर की तरह आक्रामक होता है। इसके बावजूद, भारत में सांप के काटने से होने वाली मौतों में सबसे बड़ा आंकड़ा नाग का ही है, क्योंकि यह आबादी वाले क्षेत्रों में बहुत आसानी से मिल जाता है।
कॉमन करैत
यह भारत के ‘बिग फोर’ (चार सबसे खतरनाक सांपों) में से एक है। इसका जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है जो सीधा तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। कॉमन करैत अक्सर रात के समय शिकार की तलाश में निकलते हैं और बेहद शांत रहकर हमला करते हैं, इसलिए इन्हें ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है।