यूनाइटेड किंगडम (UK) के सशस्त्र बलों ने इंग्लिश चैनल में एक हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन चलाकर रूसी ‘शैडो फ्लीट’ के तेल टैंकर ‘MV Smyrtos’ को अपने कब्जे में ले लिया है।
परिवार की भावुक अपील
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में टैंकर के भारतीय मास्टर (कप्तान), 38 वर्षीय अजय पंत को रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। कैप्टन अजय पंत मूल रूप से भारत के उत्तराखंड राज्य के नैनीताल के रहने वाले हैं। जिस पर उनकी पत्नी ने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर उनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी की गुहार लगाई है। जिस पर कैप्टन अजय पंत की पत्नी रीतु पंत ने बताया कि उन्हें इस पूरी घटना की जानकारी ब्रिटिश मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने अपने पति को बेकसूर बताते हुए कहा कि अजय पिछले 15 सालों से मर्चेंट नेवी में हैं और उनका पूरा करियर बेदाग रहा है। एक कैप्टन के तौर पर वे सिर्फ अपनी शिपिंग कंपनी के आदेशों का पालन कर रहे थे। उनका प्रतिबंधों की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। मैं भारत सरकार से अपील करती हूँ कि उन्हें जल्द से जल्द रिहा कराया जाए। वहीं मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया है। उत्तराखंड के गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि राज्य सरकार ने नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय (MEA) को पत्र लिखकर कैप्टन पंत की रिहाई के लिए राजनयिक मदद मांगी है।
जानें क्या है मामला
रिपोर्ट्स के मुताबिक कैप्टन अजय पंत के नेतृत्व में ‘MV Smyrtos’ नामक टैंकर 4 जून को रूस के उस्त-लुगा (Ust-Luga) टर्मिनल से 1,01,400 टन उराल क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) लेकर भारत के गुजरात स्थित सिक्का पोर्ट (जामनगर) के लिए रवाना हुआ था। 14 जून को इंग्लिश चैनल से गुजरते समय ब्रिटिश रॉयल मरीन्स के कमांडोज ने हेलीकॉप्टर के जरिए टैंकर पर एयरड्रॉप किया और जहाज़ को अपने नियंत्रण में ले लिया। 16 जून को कैप्टन पंत को साउथेम्प्टन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया। उन पर ‘रूस (सैंक्शंस) रेगुलेशंस 2019’ के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया गया है। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को बोर्नमाउथ क्राउन कोर्ट में होगी। यूके के कानूनों के तहत इस अपराध के लिए अधिकतम 10 साल तक की कैद का प्रावधान है। जहाज पर अभी भी 24 भारतीय और जॉर्जियन क्रू सदस्य (चालक दल) सवार हैं। सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी चिंताओं को देखते हुए टैंकर को वेमाउथ (डोरसेट) के पास लंगर डालकर सख्त निगरानी में रखा गया है।