आज योगिनी एकादशी की जानकारी देंगे। 10 जुलाई को योगिनी एकादशी है। साल में 24 एकादशी तिथि होती हैं। सभी एकादशी का खास महत्व होता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर योगिनी एकादशी व्रत किया जाता है। सनातन धर्म में इस एकादशी का खास महत्व है। सनातन धर्म में एकादशी तिथि को बेहद शुभ माना गया है। योगिनी एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है, जो समस्त पापों का नाश करने और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को कुष्ठ जैसे रोगों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
योगिनी एकादशी व्रत
योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। भगवान विष्णु को पंचामृत प्रिय है। योगिनी एकादशी पर पूजा के अंत में प्रभु को पंचामृत का भोग जरूर लगाएं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी और श्री हरि प्रसन्न होते हैं। जल से स्नान कराने के बाद शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और देवी-देवता को स्नान कराएं। इसके बाद फिर से शुद्ध जल से स्नान कराएं। हार-फूल और वस्त्रों से भगवान का श्रृंगार करें। चंदन का तिलक लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। विष्णु जी को मोतीचूर के लड्डू अर्पित करें। इससे एकदशी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
जानें शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि की शुरुआत 09 जुलाई को शाम 07 बजकर 46 मिनट के लगभग से शुरू होगी और इस तिथि का समापन 10 जुलाई को शाम 4 बजकर 52 मिनट के लगभग पर होगा। उदयातिथि के आधार पर योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई दिन शुक्रवार को रखा जाएगा।
योगिनी एकादशी व्रत का पारण 11 जुलाई 2026 को किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 02 मिनट से सुबह 09 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। पारण के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 07 बजकर 02 मिनट है।