देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिसमें यह स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, संरक्षण और भरण-पोषण के लिए सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल बच्चों या अन्य परिजनों को बुजुर्गों की संपत्ति से बेदखल करने का आदेश दे सकता है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी साफ किया है कि यह अधिकार सामान्य पारिवारिक विवादों के लिए नहीं है, बल्कि बेदखली का आदेश तभी दिया जा सकता है जब यह बुजुर्गों की सुरक्षा और देखभाल के लिए अत्यंत आवश्यक हो। जिसमें रविकांत गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद द्वारा बनाए गए ‘सीनियर सिटीजन्स एक्ट 2007’ का मूल उद्देश्य बुजुर्गों को उपेक्षा, असुरक्षा और अपमान से बचाना और उन्हें शीघ्र व प्रभावी राहत देना है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलटा
यह मामला लखनऊ के विकास नगर निवासी रविकांत गुप्ता से जुड़ा है। उन्होंने अपने बेटे पर 81 वर्षीय बुजुर्ग दादी को प्रताड़ित कर वृद्धाश्रम भेजने का आरोप लगाया था। जून 2022 में एसडीएम और बाद में 9 अगस्त 2023 को डीएम ने रविकांत की स्व-अर्जित संपत्ति से उनके बेटे और बहू को बेदखल करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने यह कहकर एसडीएम व डीएम के आदेश को रद्द कर दिया था कि ‘सीनियर सिटीजन्स एक्ट 2007’ के तहत अधिकारियों को बेदखली का आदेश देने का वैधानिक अधिकार नहीं है।