अल्मोड़ा: एनआरएलएम से बदली राधा रावत की किस्मत,  डेयरी और पशुपालन को बनाया आजीविका का माध्यम, हर महीने इतने हजार की कमाई

अल्मोड़ा: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदलने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में बेहद कारगर साबित हो रहा है।

सुधारी आर्थिकी

इसी क्रम में अल्मोड़ा जिले के विकासखण्ड भिकियासैंण स्थित ग्राम धमेडा की रहने वाली राधा रावत ने इस योजना से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल भी पेश की है। कभी सिर्फ एक गृहिणी के रूप में जीवन बिताने वाली राधा आज हर महीने ₹20 हजार की अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। वर्ष 2022 से पहले राधा रावत के पास आय का कोई नियमित जरिया नहीं था। स्वरोजगार और मार्गदर्शन के अभाव में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। वर्ष 2022 में उन्होंने ‘ज्योति स्वयं सहायता समूह’ की सदस्यता ली। समूह, ग्राम संगठन और क्लस्टर बैठकों में भाग लेते हुए उन्हें एनआरएलएम की विभिन्न आजीविका योजनाओं की जानकारी मिली।
एनआरएलएम के तहत विकासखण्ड स्तर पर आयोजित डेयरी प्रशिक्षण शिविर में भाग लेकर राधा ने पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के गुर सीखे। इसके बाद उन्होंने पंतनगर से एक उन्नत नस्ल की गाय व भैंस खरीदी और राजस्थान से बकरियां लाकर अपना पशुपालन कार्य शुरू किया। उन्होंने गांव में ही डेयरी स्थापित कर स्थानीय स्तर पर दूध बेचना शुरू किया, जिसकी मांग तेजी से बढ़ने लगी।

सालाना आय ₹2.50 लाख

वित्तीय सहायता और तकनीकी प्रशिक्षण के बल पर राधा रावत का यह व्यवसाय लगातार बढ़ता गया। वर्तमान में उनके दुग्ध उत्पादों की बिक्री धमेडा, घुघती और बाजन के स्थानीय बाजारों एवं दुकानों में हो रही है। इस व्यवसाय से उन्हें अब हर महीने लगभग ₹20 हजार की अतिरिक्त आय हो रही है, जिससे उनकी वार्षिक आय ₹2.50 लाख के करीब पहुंच गई है।