उत्तराखंड: नंदा देवी लोकजात: ​कनोल में नंदा भगवती की विशेष पूजा, अब 16 सितंबर को होगा दशोली, बण्ड और बधाण की डोलियों की ऐतिहासिक भेंट

उत्तराखंड: थराली/कनोल: नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से कैलाश यात्रा पर निकली दशोली और बण्ड़ परगना की श्री नंदा देवी की डोलियां एवं छंतोलियां मंगलवार को नंदानगर के कनोल गांव में ही विश्राम करेंगी।

शेड्यूल में आंशिक संशोधन

बधाण (थराली) लोकजात समिति द्वारा यात्रा कार्यक्रम में बदलाव किए जाने के कारण तिथियों में यह अंतर आया है।
​जानकारी के अनुसार पूर्व में जारी कार्यक्रम के अनुसार बधाण की नंदा देवी डोली को 15 सितंबर को वांण गांव पहुंचना था, जहां अन्य क्षेत्रों की डोलियों के साथ उसका मिलन तय था। हालांकि, अगस्त में श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी लोकजात समिति बधाण-थराली द्वारा जारी संशोधित तालिका में ‘इच्छोली (देवाल)’ को एक अतिरिक्त पड़ाव के रूप में शामिल किया गया। इस वजह से बधाण की डोली अब 16 सितंबर को वांण पहुंचेगी।
​बधाण समिति के इस फैसले के बाद दशोली और बण्ड़ परगना की आयोजन समितियों ने भी अपने शेड्यूल में आंशिक संशोधन किया है।

नए तय कार्यक्रम के तहत

• ​सोमवार: दशोली और बण्ड़ की डोलियां व छंतोलियां नंदानगर ब्लॉक के कनोल गांव पहुंचीं।
• ​मंगलवार: कनोल गांव में आयोजित तीन दिवसीय विशेष पूजा-अर्चना और मेले के निमित्त सभी डोलियां यहीं प्रवास करेंगी।
• ​बुधवार (16 सितंबर): डोलियां कनोल से आगे बढ़कर वांण गांव पहुंचेंगी, जहां बधाण की नंदा डोली के साथ इनका ऐतिहासिक मिलन (भेंट) होगा।

की जाएगी वैकल्पिक व्यवस्था

कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला ने बताया कि तिथियों में बदलाव के चलते यह फैसला लिया गया है। 16 सितंबर को वांण पहुंचने पर डोलियों के मिलन के साथ-साथ लाटू देवता की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। वांण गांव में ग्रामीणों के रुख पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि समिति लगातार स्थानीय ग्रामीणों के संपर्क में है और उम्मीद है कि वे यात्रा का भव्य स्वागत करेंगे। यदि किसी कारणवश सहयोग नहीं मिलता है, तो समिति द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।