अल्मोड़ा: मेडिकल कॉलेज में ‘डायबिटिक रेटिनोपैथी’ पर लगी कार्यशाला, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी— गांवों में बढ़ रही शुगर की बीमारी, आंखों को बड़ा खतरा

अल्मोड़ा: स्थानीय मेडिकल कॉलेज के मेडिकल एजुकेशन यूनिट (MEU) द्वारा ‘मधुमेह जनित नेत्र रोग’ (डायबिटिक रेटिनोपैथी) पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

इस दौरान देश के प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञों ने मधुमेह (शुगर) के कारण आंखों पर पड़ने वाले जानलेवा प्रभावों पर गहन चर्चा की। जिसमें विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा कि जो बीमारी पहले केवल शहरों तक सीमित मानी जाती थी, वह अब ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से पांव पसार रही है। साथ ही डॉक्टरों ने जोर देकर कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सही खान-पान, जीवनशैली में बदलाव और नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति सतर्क करना बेहद जरूरी

इन बीमारियों से खतरा

बताया कि देश की लगभग 10 प्रतिशत वयस्क आबादी मधुमेह की चपेट में आ चुकी है।‌ मधुमेह की सबसे गंभीर जटिलताओं में ‘डायबिटिक रेटिनोपैथी’ प्रमुख है, जो समय पर इलाज न मिलने पर आंखों की रोशनी पूरी तरह छीन सकती है।‌ विशेषज्ञों ने सलाह दी कि शुगर के मरीजों को नियमित रूप से अपने पर्दों (रेटिना) की जांच कराते रहना चाहिए, ताकि शुरुआती स्तर पर ही बीमारी को बढ़ने से रोका जा सके।