SBI डेटा लीक मामला: डार्क वेब पर लाखों ग्राहकों की जानकारी लीक होने की पुष्टि, बैंक ने शुरू की जांच

देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों के डेटा से जुड़ा एक बड़ा साइबर सुरक्षा मामला सामने आया है।

की यह पुष्टि

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक ने इस बात की पुष्टि की है कि उसके कुछ ग्राहकों का निजी डेटा डार्क वेब पर लीक हुआ है। बैंक ने बुधवार को स्टॉक एक्सचेंज में दाखिल अपनी रिपोर्ट में इस घटना की जानकारी दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते दिनों ‘Siriusim’ नामक एक तथाकथित साइबर फ्रॉड ग्रुप ने डार्क वेब पर SBI के करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड लीक होने का दावा किया था। इस बात का खुलासा साइबर सुरक्षा से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट ‘CyberPulse56’ के जरिए हुआ था।इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ने तुरंत डार्क वेब पर मौजूद इन रिकॉर्ड्स की समीक्षा की। बैंक की शुरुआती समीक्षा में 3,897 ऐसे रिकॉर्ड मिले हैं, जिनमें ग्राहकों की व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी (PII) शामिल है। लीक हुए इस डेटा में ग्राहकों के मोबाइल नंबर, पते और लोन से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार, लीक हुई इस निजी जानकारी का इस्तेमाल साइबर ठग फर्जी कॉल, फिशिंग मैसेज और बैंक अधिकारी बनकर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए कर सकते हैं। हालांकि, बैंक ने अभी तक प्रभावित ग्राहकों की सूची या उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचना देने के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। बैंक का कहना है कि डेटा लीक के कारणों और इसके संपूर्ण दायरे का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है।

​सरकार के कदम

रिपोर्ट्स के मुताबिक SBI का कहना है कि साइबर घटना से निपटने और उसके प्रभाव को सीमित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। घटना की व्यापक जांच के लिए CERT-In (भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम) द्वारा मान्यता प्राप्त एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। हाल ही में CERT-In ने चेतावनी दी थी कि कुछ AI मॉडल बिना अनुमति भारतीय संगठनों की गोपनीय जानकारी तक पहुंच गए थे। बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में इस तरह की साइबर घटनाओं से निपटने के लिए CSIRT-Fin, CERT-In के साथ मिलकर काम कर रहा है। सरकार के ‘Information Security Education and Awareness’ (ISEA) कार्यक्रम के तहत लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।
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