डिजिटल ट्रांजैक्शन पर टैक्स विभाग की नजर, UPI से आया 1 रुपया भी रडार पर, देना पड़ सकता है हिसाब, जानें यह कड़े नियम

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देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। यदि आप यह सोचते हैं कि यूपीआई (UPI) से छोटे-मोटे लेनदेन करने पर इनकम टैक्स विभाग की नजर आप पर नहीं पड़ेगी, तो सावधान हो जाइए।

हो सकती है पूछताछ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 102 के तहत कर विभाग को बिना हिसाब-किताब के खाते में आई किसी भी राशि पर सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रकम छोटी हो या बड़ी, विभाग आपसे कभी भी जवाब तलब कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘1 फाइनेंस’ के टैक्स हेड सीए पराग जैन का कहना है कि जिस तरह बैंक खाते में आए 6 लाख रुपये पर नोटिस या पूछताछ हो सकती है, ठीक उसी तरह 60 हजार रुपये की राशि पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं। टैक्स विभाग सिर्फ इस बात से यह तय नहीं करता कि राशि कितनी बड़ी है, बल्कि यह देखता है कि क्या वह राशि आपकी घोषित आय से मेल खाती है या नहीं।
​आय से अधिक ट्रांजैक्शन पड़ेगा भारी

​रिपोर्ट्स के मुताबिक एक आसान उदाहरण से समझो तो मान लीजिए किसी नौकरीपेशा व्यक्ति की सालाना घोषित आय 12 लाख रुपये है। लेकिन एक वित्त वर्ष के दौरान उसके बैंक खाते में दोस्तों, रिश्तेदारों या अन्य जरियों से कुल 40 लाख रुपये जमा हो जाते हैं। भले ही यह पैसा यूपीआई या डिजिटल माध्यमों से आया हो, लेकिन घोषित कमाई से कहीं अधिक रकम खाते में दिखने पर टैक्स विभाग इसका हिसाब मांग सकता है। इनकम टैक्स कानून में यूपीआई लेन-देन के लिए कोई अलग से सालाना सीमा तय नहीं की गई है। पराग जैन के अनुसार, स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन (SFT) के नियम मुख्य रूप से कैश (नकद) जमा पर लागू होते हैं। ​बचत खाता एक साल में 10 लाख रुपये या उससे अधिक कैश जमा होने पर बैंक इसकी रिपोर्ट विभाग को देता है। ​चालू खाता में एक साल में 50 लाख रुपये या उससे अधिक कैश जमा होने पर रिपोर्टिंग की जाती है। SFT की ये नकद सीमाएं UPI, NEFT, RTGS या IMPS जैसे डिजिटल ट्रांजैक्शन पर सीधे लागू नहीं होती हैं। इसके अलावा, एनपीसीआई (NPCI) या बैंकों द्वारा तय की गई रोजाना 1 लाख रुपये की यूपीआई सीमा का इनकम टैक्स के नियमों से कोई संबंध नहीं है। जब भी विभाग किसी मामले में बैंक खाते की स्क्रूटनी या जांच करता है, तो पूरा बैंक स्टेटमेंट खंगाला जाता है। उस दौरान यदि आय से अधिक राशि पाई जाती है, तो हर एक एंट्री का हिसाब देना अनिवार्य हो जाता है। टैक्स विभाग के नजरिए से यदि आपके खाते में पैसा आया है और आपने उसे तुरंत किसी और को भेज दिया है, तो भी आप जवाबदेही से नहीं बच सकते।

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