चौखुटिया, सुर सम्राट स्वर्गीय गोपाल बाबू गोस्वामी की 80वीं जयंती उनके पैतृक गांव चांदीखेत के बैराठेश्वर मंदिर परिसर में सादे समारोह के बीच मनाई गई ।
पुत्र रमेश ने उनके गीत गाकर यादों को किया ताजा:
उनके परिजनों व सामाजिक संगठन से जुड़े लोगों ने दीप प्रज्वलित कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए याद किया गया मौके पर उनके कनिष्ठ पुत्र लोक गायक रमेश बाबू गोस्वामी ने उनके गाए गीतों की प्रस्तुति भी दी गई।
उनके जीवन में आए उतार चढ़ाव की चर्चा हुई:
कोविड-19 के चलते इस बार सादे समारोह में स्वर्गी गोपाल बाबू गोस्वामी की 80वी जयंती पर उनके चित्र के आगे दीप प्रज्वलित कर उनके परिजनों व सामाजिक लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया इस अवसर पर बैराठेश्वर मंदिर परिसर में एक विचार गोष्ठी भी हुई जिसमें उनके जीवन के उतार-चढ़ाव उनके द्वारा पहाड़ की जीवन चर्या, समसामयिक व्यवस्था, पति- पत्नी के वियोग ,देवी देवताओं की स्तुति पर आधारित गानों को तात्कालिक व्यवस्था का वास्तविक चित्रण बताया गया।
स्व.गोपाल बाबू गोस्वामी के गानों को एक मिसाल बताया:
रंगकर्मी जसी राम आर्य ने उनके गानों की पहचान को एक मिसाल बताया तथा देश-विदेश सहित, नैनीताल में ड्रामा एवं सांग डिवीजन में साथ साथ बिताए। उन दिनों की याद को ताजा किया।
लोक गायक उनके पुत्र रमेश गोस्वामी ने कई गीतों से उन्हें याद किया:
इस अवसर पर उनके कनिष्ठ पुत्र लोक गायक रमेश बाबू गोस्वामी ने कैले बजै मुरुली——, हिमालय का ऊंचा डाना प्यारो मेरो गांव —–,भूर भूरु उजाऊ हैगो— ,हवा चली सन सन —–,बेडू पाको बारो मासा सहित विदाई के गीत गाकर उनकी याद को ताजा किया।
कायकर्म में मौजूद रहे:
स्व.गोपाल बाबू गोस्वामी की पत्नी मीरा गोस्वामी, पुत्र रमेश गोस्वामी, गिरीश गोस्वामी, अशोक गोस्वामी, रंगकर्मी जसी राम आर्या,गोपाल गिरी, सामाजिक कार्यकर्ता किशन सिंह संगेला ,युवराज सिंह, पुष्कर सिंह, रमेश अग्रवाल ,मदन कुमैया, लक्ष्मण गिरि ,संदीप गोस्वामी ,संतोष गोस्वामी ,लोक कलाकार नंदलाल आर्य ,देवेंद्र आर्य मौजूद रहे।