उत्तराखंड: 18 सालों से वाहनों का पंक्चर बना रही ये महिला, पहाड़ की अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा की स्रोत

भारतीय समाज आमतौर पर कुछ दायरों में विभाजित है जिसमें पुरुषों और महिलाओं के अलग अलग कार्य निर्धारित हैं। आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ अब भी ये माना जाता है कि पुरुषों का काम घर से बाहर काम करके कमाने का है और महिलाओं का कार्य घर संभालने का है। लेकिन हमारी पहाड़ी संस्कृति और इतिहास में कई नारियां हुई हैं जिन्होंने इस धारणा को गलत साबित करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है।

18 वर्षों से गाड़ियों के पंचर बनाने का काम रही हैं कमला नेगी

नैनीताल जिले के रामगढ़ ब्लॉक के ओड़ाखान की रहने वाली कमला नेगी आज वो काम कर रही हैं जो आमतौर पर इस क्षेत्र की किसी भी महिला को करते हुए नही देखा जा सकता और सामान्यतः ये काम केवल पुरुष ही करते हैं। 54 वर्षीय कमला नेगी  बीते 18 सालों से साइकिल से लेकर जेसीबी मशीन व बड़े ट्रक के टायरों के पंचर बनाने का काम कर रही है। जबकि उनके पति हयात सिंह खेती कर रहे हैं।

54 वर्ष की उम्र में भी पूरी लगन के साथ कर रही हैं गाड़ियों की सर्विसिंग

कमला नेगी छोटे वाहनों की सर्विस भी खुद ही कर देती है। उनके काम के प्रति लगन का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि उनका एक पुत्र भारतीय सेना में होने के बावजूद आज भी कमला नेगी अपने कार्य का बखूबी कर रही हैं। 54 वर्ष की आयु में जहाँ महिलाएं अक्सर शारीरिक रूप से कमजोर होने लग जाती है, वही कमला नेगी आज भी अपने कार्य को बखूबी अंजाम दे रही है।कमला नेगी अनुसार पहले वे साइकिल रिपेयर की दुकान चलाती थी,और धीरे धीरे बिना किसी डिग्री के केवल अपनी लगन के कारण वे सभी गाड़ियों के टायरों का पंचर भी बनाने लगी, और अब गाड़ियों की उनको इतनी जानकारी हासिल हो गयी कि वे गाड़ियों की सर्विस भी कर लेती है।