खतरे की घंटी: उत्तराखंड के जंगलों में 500 की जगह इतने गुलदार, शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

उत्तराखंड: उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बड़ा चिंता का विषय है। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. दिनेश चंद्र भट्ट के नेतृत्व में किए गए एक ताजा अध्ययन के अनुसार, राज्य में गुलदारों की संख्या उनकी प्राकृतिक धारण क्षमता से कई गुना ज्यादा हो गई है, जो इस बढ़ते संघर्ष का मुख्य कारण है।

किया यह शोध

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आंकड़ों का असंतुलन में राज्य में वर्तमान में 2,275 से अधिक गुलदार हैं, जबकि जंगलों की क्षमता केवल 500 के आसपास है। एक गुलदार को 30-50 वर्ग किमी का ‘होम रेंज’ चाहिए। जगह की कमी के कारण ये आबादी वाले क्षेत्रों और झाड़ियों की ओर रुख कर रहे हैं। पौड़ी गढ़वाल में स्थिति भयावह है, जहाँ अकेले 2025 में 15 से अधिक लोग गुलदार का निवाला बन चुके हैं। टिहरी में भी हर साल औसतन 3 मौतें और 7 घायल दर्ज हो रहे हैं। शोध में स्पष्ट किया गया कि यह कहना गलत है कि जंगलों में भोजन कम है, असल में वनों के घनत्व और वन्यजीवों की संख्या, दोनों में वृद्धि हुई है। इस शोध पत्र को रूस की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘बायोलाजी बुलेटिन’ में स्थान मिला है। डॉ. दिनेश चंद्र भट्ट के साथ डॉ. मोहन कुकरेती, डॉ. विनय सेठी और अन्य विशेषज्ञों ने इस अध्ययन को पूरा किया है।