अल्मोड़ा: अदालत का फैसला, दहेज उत्पीड़न मामले में अभियुक्त को किया दोषमुक्त

अल्मोड़ा से जुड़ी खबर सामने आई है। अल्मोड़ा में जिला सत्र न्यायाधीश श्रीकांत पांडे की अदालत ने दहेज मामले में अपना फैसला सुनाया है। जिसमें अदालत ने अभियुक्त को दोषमुक्त किया है। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा की गई अपील में भी दहेज उत्पीड़न करने वाला अभियुक्त दोषमुक्त किया गया है। उक्त मामले में अभियुक्त की ओर से विद्वान अधिवक्ता भगवती प्रसाद पन्त व महेश चन्द्र सिंह परिहार ने पैरवी की।

जानें क्या है मामला

जानकारी के अनुसार यह मामला अल्मोड़ा निवासी एक महिला से जुड़ा है। महिला ने कुमाऊं गरूड़ बागेश्वर निवासी अपने पति एम.एस परिहार पर दहेज के लिए मारपीट और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। महिला का कहना था कि उसकी शादी जून 2011 में हुई थी और शादी के तुरंत बाद से ही उसे दहेज को लेकर प्रताड़ित किया जाने लगा। पति सेना में जवान है और पोस्टिंग के चलते वह उसे अपने साथ हिसार, हरियाणा और बाद में दिल्ली लेकर गया। दोनों कुछ समय हल्द्वानी में किराए के मकान में भी रहे, जहां उनके दो बच्चे भी हुए। महिला ने जनवरी 2023 में न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। अदालत के निर्देश पर पुलिस ने पति के खिलाफ धारा 323, 498-ए, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद मामला अदालत में चला और दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।

अदालत का आदेश

जिस पर जिला सत्र न्यायाधीश श्रीकांत पांडे ने अपने फैसले में कहा कि गंभीर और लगातार उत्पीड़न की स्थिति में इतनी लंबी देरी संदेह पैदा करती है। अदालत ने अहम सवाल उठाया कि अगर शादी के तुरंत बाद से ही उत्पीड़न हो रहा था, तो 11 वर्षों तक किसी भी थाने या अदालत में शिकायत क्यों नहीं की गई। पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव और शिकायत में असामान्य देरी को देखते हुए अदालत ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा और फौजी पति को सभी आरोपों से बरी कर दिया।