अल्मोड़ा से जुड़ी खबर सामने आई है। अल्मोड़ा में विशेष सत्र न्यायाधीश श्रीकांत पाण्डेय की अदालत ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने व दूल्हे और पंडित को घोड़े से उतारने के मामले में अभियुक्तों को दोषमुक्त किया। इस मामले में अभियुक्तगण की ओर से विद्वान अधिवक्ता भगवती प्रसाद पन्त व धनंजय साह ने पैरवी की।
जानें क्या है मामला
जानकारी के अनुसार दिनांक 04.05.2022 को वादी दर्शन लाल, निवासी ग्राम थला तड़ियाल, राजस्व उपनिरीक्षक क्षेत्र टुकरा तहसील सल्ट जिला अल्मोड़ा द्वारा एक लिखित तहरीर उपजिलाधिकारी तहसील सल्ट, जिला अल्मोड़ा को इन कथनों के साथ दी कि वह अनुसूचित जाति (शिल्पकार) परिवार का सदस्य है। दिनांक 02.05.2022 को उसके पुत्र विक्रम कुमार का विवाह था। बारात प्रस्थान के समय 04:30 बजे के लगभग ग्राम थला तड़ियाल के तोक मजबाखली के कुछ महिलाओं व पुरूषों तारा देवी पत्नी कुबेर सिंह, जीबुली देवी पत्नी रमेश सिंह, रूपा देवी पत्नी शिव सिंह, भगा देवी पत्नी आनन्द सिंह, मना देवी पत्नी रतन सिंह, कुबेर सिंह पुत्र मुकन्द सिंह आदि लोगों द्वारा दूल्हे को अनुसूचित जाति का होने के कारण घोड़े से जबरन उतारने की कोशिश की गयी, साथ ही जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और समस्त बारातियों को मारने व कफल्टा काण्ड की धमकी दी गयी कि अगर दूल्हे को घोड़े से उतारा नहीं गया तो पूरे बारातियों को कफल्टा काण्ड की तरह ही मार दिया जायेगा। कहा यदि फिर से कोई अनुसूचित जाति की बारात में दूल्हा घोड़े में बैठकर आयेगा तो सभी बारातियों को जिन्दा जला दिया जायेगा। ऐसा करना कानून व संविधान के खिलाफ है एवं अनुसूचित जाति वर्ग के व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों का हनन है। उक्त लिखित रिपोर्ट के आधार पर नायब तहसीलदार सल्ट (खुमाड), जिला अल्मोड़ा में अभियुक्तगण तारा देवी, जीबुली देवी, रूपा देवी, भगा देवी, मना देवी व कुबेर सिंह के विरूद्ध धारा 504 व 506 भारतीय दण्ड संहिता एवं धारा 3(x), 3(xiv) एस०सी०/एस०टी० एक्ट के अन्तर्गत मामला दर्ज हुआ।
अदालत का आदेश
जिसके बाद यह मामला न्यायालय में चला। जहां विशेष सत्र न्यायाधीश द्वारा पत्रावली का अवलोकन कर 06 अभियुक्तों को दोषमुक्त किया गया।