अल्मोड़ा में न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट, अल्मोड़ा नवल सिंह बिष्ट की अदालत ने एक मामले में फैसला सुनाया है। जिसमें अदालत ने इन्दु खम्पा पुत्री हीरा सिंह खम्पा, निवासी गोटिया मार्केट, नियर लोहे का शेर, दुकान नं० 10 अल्मोड़ा को चेक बाउंस के एक मामले में छह माह के कारावास और भारी जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट नवल सिंह बिष्ट की अदालत ने दोषी को पीड़ित पक्ष को हर्जाना देने के भी आदेश दिए हैं। परिवादी के अधिवक्ता गजेंद्र सिंह मेहता ने पैरवी की।
जानें क्या है मामला
जानकारी के अनुसार आपसी विश्वास और व्यापारिक परिचय के नाम पर ली गई उधार धनराशि वापस न करना एक महिला व्यवसायी को भारी पड़ गया है। चेक बाउंस होने के इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट, अल्मोड़ा की अदालत ने कड़ा संज्ञान लिया है। मामला परकाम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 138 के तहत दर्ज किया गया है। परिवादी शहाबुद्दीन (निवासी नृसिंहबाड़ी, अल्मोड़ा) ने भोटिया मार्केट में दुकान चलाने वाली महिला इंदु खम्पा के विरुद्ध न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई थी। इंदु खम्पा ने व्यावसायिक कार्य हेतु शहाबुद्दीन से मदद मांगी थी। शहाबुद्दीन ने अलग-अलग किश्तों में कुल ₹1,35,000 (एक लाख पैंतीस हजार रुपये) की सहायता प्रदान की। धनराशि वापसी के लिए इंदु ने पंजाब नेशनल बैंक, शाखा अल्मोड़ा का ₹1,35,000 का चेक (दिनांक 16.09.2024) जारी किया। जब परिवादी ने चेक बैंक में लगाया, तो खाते में ‘अपर्याप्त धनराशि’ होने के कारण वह अनादरित (बाउंस) हो गया। आरोपी के कहने पर जब दोबारा 20 सितंबर 2024 को चेक बैंक में प्रस्तुत किया गया, तो वह फिर से बाउंस हो गया। इसके बाद आरोपी महिला ने धनराशि लौटाने या बात करने से स्पष्ट मना कर दिया। शहाबुद्दीन ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से 4 अक्टूबर 2024 को एक पंजीकृत कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें 15 दिनों के भीतर भुगतान करने को कहा गया। नोटिस प्राप्त होने के बावजूद, आरोपी द्वारा गलत तथ्यों के आधार पर प्रत्युत्तर देने और भुगतान न करने पर यह मामला अदालत में चला। नोटिस देने के बावजूद धनराशि वापस न करने पर मामला अदालत पहुँचा।
अदालत का आदेश
सोमवार (23 मार्च 2026) को अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी इंदु खम्पा को दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को 6 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर ₹1,60,000 (एक लाख साठ हजार रुपये) का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माने की कुल राशि में से ₹1,57,000 परिवादी (शहाबुद्दीन) को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे, जबकि ₹3,000 राज्य के पक्ष में जमा होंगे।