अल्मोड़ा जिले से जुड़ी खबर सामने आई है। कुमाऊं वन श्रमिक संघ ने वन विभाग के चिंतन सभागार में बैठक आयोजित कर वन श्रमिकों के नियमितीकरण की मांग की। उन्होंने विभाग में 10 साल की सेवा पूरी करने वाले श्रमिकों को 18 हजार रुपए न्यूनतम वेतन देने के लिए कहा।
सरकार की उपेक्षा के चलते प्रदेश में 150 वन श्रमिकों का नहीं हुआ है नियमितीकरण
वन श्रमिकों ने कहा कि वे बीते तीन दशकों से विभाग में सेवा दे रहे हैं लेकिन उन्हें अब तक नियमित नहीं किया गया है। सरकार की उपेक्षा के चलते प्रदेश में 150 वन श्रमिकों का नियमितीकरण नहीं हुआ है जिससे उनका भविष्य खतरे में है। उन्होंने कहा कि कई श्रमिकों को विभाग में सेवा देते हुए 10 साल से अधिक हो गए हैं लेकिन उन्हें न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है।
न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपए देने की मांग की
उन्होंने न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपए देने की मांग की। उन्होंने कहा कि 1996 से पूर्व के श्रमिकों का नियमितीकरण किया गया था लेकिन वेतन कोड नहीं मिला। चेतावनी दी कि जल्द मामले में निर्णय नहीं लिया गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
नियमितीकरण जल्द न होने पर आन्दोलन को होंगे मजबूर
कुंदन लाल, अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में 150 श्रमिकों का नियमितीकरण नहीं हुआ है जिससे वे परेशान हैं। नियमितीकरण जल्द न हुआ तो संगठन आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।
कर्मचारियों की उपेक्षा नहीं की जाएगी बर्दाश्त
शिवराज सिंह, महामंत्री द्वारा यह कहा गया कि 10 साल से सेवारत वन श्रमिकों को न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपए दिया जाना चाहिए जिससे वे आसानी से जीवन यापन कर सकें। कर्मचारियों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मौजूद रहे
बैठक में राजेंद्र पूना, हीरा सिंह, खिलानंद भट्ट, संजय कुमार आर्य, पूरन नेगी आदि मौजूद रहे।