अल्मोड़ा सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अर्थशास्त्र विभाग एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तराखण्ड के संयुक्त तत्वाधान में आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर “भारत की आजादी की पृष्ठभूमि’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।
वर्तमान में विकसित सैन्य शक्ति की भूमिका का विवरण प्रस्तुत किया
संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि डिप्टी कमांडेन्ट मनोहर सिंह नेगी सेवानिवृत्त एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कानफिडेशन ऑफ एक्स, पैरामिल्टरी फोर्स, पर्सनल वैलफेयर एशोसियेशन (राष्ट्रपति पुलिस पदक) द्वारा किया गया, उनके द्वारा बी. एन.एफ. I.T.B.P, C.R.PF की उदावाद के खिलाफ पंजाब एवं कश्मीर की के आलोक में पहले दशक में किए गए आपरेशनो सहित वर्तमान में भारतीय सीमा पर सामरिक आवश्यकताओं एवं वर्तमान में विकसित सैन्य शक्ति की भूमिका का विवरण प्रस्तुत किया व इसकी तुलना आजादी से पूर्व की स्थितियों से किया ।
संगोष्ठी संयोजक एवं विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र द्वारा संगोष्ठी के विषयों के संदर्भ में प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत लेखो से सन्दर्भित विषय जो आजादी से संबंधित थे पर परिचय दिया जिसमें आजादी में महिलाओं, हिन्द फौज, स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी, पत्रकारिता की भूमिका एवं आबादी में 75 वर्षों में शिक्षा में परिवर्तन, श्रम, उद्योग, रोजगार सहित स्वतन्त्रता के स्थानीय नायकों पर प्रकाश डाला,
अगस्त माह में विद्यालयों में व्याख्यानों का आयोजन भी किया जाता रहेगा
संगोष्ठी के सह-संयोजक प्रो. नारायण दत्त काण्डपाल, प्रभारी कुमाऊं संभाग, द्वारा अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की संरचना एवं कार्य प्रणाली का परिचय देते हुए बताया कि
वर्तमान में पूरे भारत वर्ष के एक लाख विद्यालयों में एक अगस्त को भारत माता के पूजन कार्यक्रम एवं माल्यार्पण कर आजादी के अमृत महोत्सव को मनाया जा रहा है। कुमाऊँ मण्डल के सभी जनपदों में इसकी व्यवस्था की जा रही है, संगोष्ठी में विभिन्न बिन्दुओं पर जो आजादी से संबंधित है को भी माह अगस्त में विद्यालयों में व्याख्यानों का आयोजन भी किया जाता रहेगा । संगोष्ठी के के तकनीकी सत्र में डॉ. विजेता सत्याल द्वारा आजादी से पूर्व अल्मोड़ा जिला के पौराणिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, आर्थिक पहलुओं को जोड़ते हुए यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलो सूर्यमंदिर, कसारदेवी, सिद्धनौला, खगमरा कोट, एवं तत्कालिन रामशिला एवं सहित मल्ला महल के महत्व के पर प्रकाश डाला ।

संगोष्ठीयो को प्रेरणादायक बताया
उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष प्रो. पी. एस. बिष्ट द्वारा आजादी का महत्व एवं वर्तमान में युवा पीढ़ी को इतिहास से प्रेरणा लेने के लिए ऐसी संगोष्ठीयो को प्रेरणादायक बताया । उदाघाटन सत्र के अध्यक्ष प्रो. पी. एस. बिष्ट द्वारा आजादी का महत्व एवं वर्तमान में युवा पीढ़ी को इतिहास से प्रेरणा लेने के लिए ऐसे संगोष्ठीयो को प्रेरणादायक बताया, भूतपूर्व सेवानिवृत सब इन्स्पेक्टर रूप सिंह बिष्ट द्वारा विश्वविद्यालय में इस प्रकार की गोष्ठियों की आवश्यकता तथा उपयोगिता को विस्तार में बताया, ।आयोजकों द्वारा पूर्व सैनिक श्री देव सिंह बिष्ट सेवानिवृत 85 वर्ष उम्र को तथा मुख्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया ।
संगोष्ठी में 12 लेखों का प्रस्तुतीकरण किया गया
उद्घाटन सत्र मे डॉ. सी.पी. फुलोरिया द्वारा अल्मोड़ा नगर के योगदान को आजादी के परिपेक्ष्य में प्रस्तुत किया, द्वितीय सत्र में विशिष्ट अधि प्रो. एस. के. अग्रवाल लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा भारतीयता की वर्तमान स्थिति एवं आजादी के पूर्व की स्थिति में संस्कृति के विचलन एवम भारतीय व्यवसाय के विलोपीकरण पर विस्तार से व्याख्या की । तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो एच सी जोशी, एवम प्रो एन डी कांडपाल द्वारा संयुक्त रूप से की गई । संगोष्ठी में
12 लेखों का प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसमें प्रस्तुतकर्ता मुख्य रुप से डॉ श्वेता चनियाल, डॉ लता जोशी, अमित जोशी, डॉ आरती परिहार, डॉ गोकुल देउपा, मोहित खर्कवाल, डॉ राजेन्द्र जोशी, डॉ भुवन चन्द्र, जगदीश प्रसाद, अंशुल टम्टा , डॉ योगेश मैराली, रश्मि, गीतांजलि , अजंली, देवेश पांडेय आदि प्रमुख थे ।
स्वतंत्रता संग्राम में निभाई गई भूमिका पर व्यापक शोध की आवश्यकता पर बल दिया
वक्ताओं के अतिरिक्त परिचर्चा में परिसर के लगभग अस्सी स्नातक स्नाकोत्तर, एवम शोध छात्रों द्वारा प्रतीभाग किया गया एवम सुझाव दिए गए । प्रो बी डी एस नेगी द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण एवम समीक्षा प्रस्तुत की गई । तथा समापन स्तर की अध्यक्षता भी उनके निर्देशन में संचालित की गई । संगोष्ठी के सारांश में प्रो एम के अग्रवाल द्वारा उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में स्वतंत्रता संग्राम से लेकर वर्तमान तक भारतीय सुरक्षा एवम स्वतंत्रता संग्राम में निभाई गई भूमिका पर व्यापक शोध की आवश्यकता पर बल दिया । संगोष्ठी का संचालन संगोष्ठी के सचिव
डॉ विजेता सत्याल अर्थशास्त्री द्वारा किया गया ।