अल्मोड़ा: भैंसियाछाना में विकास की दरकार: 70 किमी दूर पढ़ाई और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर CM को भेजा ज्ञापन, उठाई यह 7 प्रमुख मांगें

अल्मोड़ा: अल्मोड़ा जिले के विकासखंड भैंसियाछाना अंतर्गत जिला पंचायत क्षेत्र-44 (सल्ला भाटकोट) की जिला पंचायत सदस्य शैलजा चम्याल ने क्षेत्र की उपेक्षा और विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर चिंता जताई है।

सौंपा ज्ञापन

उन्होंने जिलाधिकारी अल्मोड़ा के माध्यम से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को एक 7 सूत्रीय मांग पत्र भेजकर क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं के शीघ्र निस्तारण की गुहार लगाई है। साथ ही
​जिला पंचायत सदस्य ने पत्र में कहा कि सरकारों की अवहेलना के कारण सल्ला भाटकोट और आसपास का क्षेत्र आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, कृषि और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। इसके कारण स्थानीय लोगों का जनजीवन, स्वास्थ्य, रोजगार और कुटीर उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

​ज्ञापन में उठाई यह मांगें

1. नौगांव में खुले नया डिग्री कॉलेज: क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए एक भी महाविद्यालय नहीं है। छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए 70 से 80 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इसलिए नौगांव में तत्काल एक महाविद्यालय की स्थापना की जाए।
2. ​धौलछीना में सीएचसी की शुरुआत व सेराघाट में सुविधाएं: क्षेत्र में सेराघाट, कनारीछीना और धौलछीना में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) हैं, लेकिन एक भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) क्रियाशील नहीं है। धौलछीना में निर्मित सीएचसी भवन में जल्द सीएचसी सेवाएं शुरू की जाएं तथा सेराघाट पीएचसी में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड मशीन और तकनीशियन (Technician) की व्यवस्था की जाए।
3. ​अतिदूरस्थ गांवों तक पहुंचे सड़क: विकास की मुख्य धारा से कटे तिमुरी, पध्या, खुड्यारी, हटौला, पतलचौरा, भनलगाँव, कुंजकिमोला, मल्लीनाली, खाटबे, धुन्पोली, तरुला एवं झिरकोट आदि दूरस्थ गांवों को सड़क मार्ग से जोड़ा जाए।
4. ​मार्ग का डामरीकरण एवं पुल निर्माण: पूर्व में निर्मित जमराडी-बेलवालगाँव-सल्लाभाटकोट-सुकना-पध्या-कनारीछीना-भौरगधेरा-नौगाँव मार्ग पर डामरीकरण कराया जाए और आवश्यक पुलों का निर्माण पूरा किया जाए।
5. ​फल संरक्षण केंद्र की स्थापना: क्षेत्र में फल उत्पादकों और किसानों की सुविधा के लिए एक ‘फल संरक्षण केंद्र’ स्थापित किया जाए।
6. ​जंगली जानवरों से बचाव के लिए निःशुल्क तारबाड़: कृषि योग्य खेतों को जंगली जानवरों के प्रकोप से बचाने के लिए शासन की योजना के तहत किसानों को निःशुल्क तारबाड़ उपलब्ध कराया जाए।
7. ​बंद पड़ी सिंचाई गुलों व नहरों का पुनरुद्धार: क्षेत्र में वर्षों से बंद पड़ी सिंचाई की गुलों और नहरों को पुनर्जीवित किया जाए, जिससे किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिल सके।

समाधान की उम्मीद

​जिला पंचायत सदस्य शैलजा चम्याल ने उम्मीद जताई है कि प्रदेश सरकार जनहित में इन समस्याओं का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए प्राथमिकता के आधार पर समाधान करेगी।