अल्मोड़ा के कोसी नदी और उसे जलापूर्ति करने वाले गाड़, गधेरों और धारों को संरक्षित एवं संवर्धित करने के लिये हवालबाग ब्लॉक के राइंका रैंगल और उमावि रौनडाल में जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के तहत नदी और उसे जलापूर्ति करने वाले गाड़ गधेरों और धारों में जलस्तर में कमी आने के कारणों पर प्रकाश डाला गया।
जल स्रोतों में पानी का स्तर लगातार हो रहा है कम
डीएम के निर्देश पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में स्वास्थ्य उपकेंद्र सूरी के फार्मास्टि गजेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि बांज, बुरांश, काफल आदि चौड़ी पत्ती प्रजाति के जंगलों के अनियंत्रित और अवैज्ञानिक दोहन और निरंतर जंगलों में आग लगने के कारण वर्षा जल को भूजल में बदलने की जंगलों की क्षमता लगातार घट रही है। इस कारण जल स्रोतों में पानी का स्तर लगातार कम हो रहा है।
वर्तमान में उपलब्ध जंगलों का संरक्षण और संवर्धन बेहद जरूरी
उन्होंने बताया कि कोसी नदी और उसे जलापूर्ति करने वाले गाड़, गधेरों और धारों को संरक्षित एवं संवर्धित करने के लिए वर्तमान में उपलब्ध जंगलों का संरक्षण और संवर्धन बेहद जरूरी है। इसके लिए जंगलों पर ग्रामीणों को निर्भरता कम करके, वनाग्नि के प्रमुख कारण ओण जलाने की परंपरा को समयबद्ध और व्यवस्थित कर और जनसहयोग से जंगलों को आग से सुरक्षित रख न केवल जल स्त्रोतों को संरक्षित किया जा सकता है।
इस मौके पर मौजूद रहे
इस मौके पर आरडी जोशी, उप वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र, गोपाल गुरुरानी, रमेश लटवाल, सोनिया बिष्ट, राधा देवी, प्रधानाचार्य आरपी जोशी, किशोर चंद्र समेत कई लोग मौजूद रहे।